‘आप’ के निशाने पर मयंक?

मुंबई | समाचार डेस्क: ‘आप’ का अंतर्विरोध सतह पर आकर उसके कमजोर होने की घोषणा कर रहा है. किसने सोचा था कि अभी हाल ही में मोदी के विजय रथ को दिल्ली में रोकने वाले केजरीवाल इतने जल्दी विरोधों से घिर जायेंगे. ‘आप’ ने हाल ही में अपने दो बड़ेनेता, प्रशांत भूषण तथा योगेन्द्र यादव के पर कतरे हैं अब महाराष्ट्र के मयंक गांधी को लेकर विवाद खड़ा हो गया है. मयंक गांधी ने आरोप लगाया है कि ‘आप’ के फैसले अनौपचारिक बीबीएम समूह लेता है जिससे उन्हें दरकिनार कर दिया गया है.

मयंक गांधी के बयान से यह सवाल उठता है कि अनौपचारिक बीबीएम समूह से उन्हें निकाल देने के बाद ही उन्होंने ब्लॉग पर पार्टी के अंदुरुनी बहसों को क्यों आम करना शुरु किया है? बहरहाल, मयंक गांधी खुद ही ‘आप’ का निशाना बनने को आतुर दिखाई दे रहें हैं. आम आदमी पार्टी के वरिष्ठ नेता मयंक गांधी ने यहां शनिवार को कहा कि मुंह बंद रखने के आदेश को चुनौती देने और आप की राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक की कार्यवाही के सार संक्षेप को लेकर पांच मार्च को दिए गए उनके बयान के कारण पार्टी के कुछ नेता उन्हें निशाना बना रहे हैं. ठीक इसी दिन पार्टी की पूर्व सदस्य अंजलि डालमिया ने भी कहा कि पार्टी के कामकाज से ‘हतोत्साहित’ होकर उन्होंने पिछले वर्ष पार्टी छोड़ दी.


मयंक गांधी ने दावा किया कि उन पर ‘पार्टी विरोधी और एके-विरोधी’ का लेबल चस्पा करने के लिए सोशल मीडिया में ‘सोचा-समझा प्रहार’ किया जा रहा है. अपने बयान को दोहराते हुए उन्होंने कहा कि उन्हें इसकी कीमत चुकानी पड़ेगी.

मयंक ने एक ब्लॉग में कहा, “दिल्ली में फैसला लेने वाला पार्टी का छोटा-सा समूह मुझे अनौपचारिक बीबीएम समूह से हटा चुका है. मेरे खिलाफ हमले आप नेता आशीष खेतान एवं अन्य की ओर से शुरू हुए हैं. महाराष्ट्र से कुछ असंतुष्ट नेताओं ने मेरे खिलाफ साक्षात्कार देना शुरू किया है. कुछ पुराने मामले खोले गए हैं.”

उन्होंने कहा कि आप संभवत: बीएमसी चुनाव में नहीं उतरने का फैसला ले सकती है या उसके लिए फैसले में देरी कर सकती है. महाराष्ट्र के नेतृत्व को चुनौती मिल सकती है और कुछ व्यक्तियों द्वारा अपयश दिया जा सकता है और सूचना मीडिया में लीक हो सकती है.

भविष्य की अपनी शंकाओं को व्यक्त करते हुए मयंक ने कहा, “और भी बातें सामने आएंगी और अंतत: मैं अत्यधिक अपमानित किया जाऊंगा ताकि मैं त्यागपत्र दे दूं. योगेंद्र यादव और प्रशांत भूषण के लिए योजना बनाई गई थी, लेकिन पार्टी में बने रहकर उन्होंने योजना ही पलट दी.”

आप की महाराष्ट्र इकाई की संयोजक रहीं अंजलि डालमिया ने शनिवार को यह भी कहा कि प्रदेश सचित प्रीति शर्मा मेनन के साथ पिछले वर्ष 5 जनवरी को उन्होंने क्यों पार्टी छोड़ दी थी.

उन्होंने कहा, “जब मैं और प्रीति मेनन ने अपने पदों से इस्तीफा दे दिया था अपने पदों से इस्तीफा दे दिया था तो इसके पीछे कुछ कारण थे. अपनी जिंदगी में पहली और आखिरी बार मैंने झूठ बोला था कि अपने परिवार के लिए मैंने इस्तीफा दिया है.”

अंजलि ने कहा, “लेकिन वास्तव में मैं इन लोगों के खेल और विवादों से हतोत्साह हो गई थी. महाराष्ट्र में तथाकथित नेताओं ने महाराष्ट्र में न तो मुद्दा उठाया और न ही उन्होंने प्रचार किया.”

चार मार्च को आप ने घोषणा की थी कि उसने वरिष्ठ नेताओं भूषण और यादव को अपनी नीति निर्धारण राजनीतिक मामलों की समिति से बाहर कर दिया है.

पार्टी की स्थापना 2012 में कई गई थी और पिछले माह हुए दिल्ली विधानसभा चुनाव में 70 में से 67 सीटें जीतकर आप सत्ता में आई है.

अपने पूर्व के ब्लॉग का उल्लेख करते हुए मयंक गांधी ने कहा कि उन्होंने राष्ट्रीय कार्यकारिणी की कार्यवाही पर मुंह बंद रखने की हिदायत को ‘व्यक्तिगत चुनौती’ दी थी और यह पार्टी नेतृत्व के खिलाफ किसी भी रूप में अवज्ञा नहीं थी.

आम तौर पर मैं विवादी व्यक्ति नहीं हूं..लेकिन अब एक रुख अपनाने का सही समय है. यह न तो पार्टी को और न ही नेतृत्व को कमजोर करेगा, बल्कि आप और उसके सिद्धांतों को जिसे हमने अपनाया है उसे मजबूत करेगा.

उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक से ही दुनियाभर के हजारों नाराज स्वयंसेवकों ने आप और अन्य पार्टियों के बीच अंतर के बारे में बात कही है.

मयंक ने घोषणा की, “मैं देश को कहना चाहता हूं कि पार्टी में भारी मतभेद है और अगले कुछ हफ्तों में हम स्वयंसेवी खुलासा करेंगे कि किन बिंदुओं पर मतभेद.”

उन्होंने हालांकि दोहराया कि वह मानते हैं कि केजरीवाल देश के लिए एक उम्मीद हैं और उनके बयान को लेकर किसी को कोई परेशानी नहीं है.

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