बारुदी सुरंग से सुरक्षित वाहनों की भारी कमी

नई दिल्ली | संवाददाता: नक्सली मोर्चे पर बारुदी सुरंग से सुरक्षित वाहनों की कमी से जूझना पड़ रहा है. बारुदी सुरंग से सुरक्षित वाहनों यानी एमपीवी की कमी से जूझने वालों में असम राइफल से लेकर आईटीबीपी तक शामिल हैं. हालत ये है कि जितनी संख्या में इन वाहनो की स्वीकृति है, उसकी तुलना में एक तिहाई वाहन भी नहीं हैं. कई अवसरों पर ऐसे वाहन होने से जवानों को नक्सलियों और दूसरे मोर्चे पर आसानी होती. लेकिन इन जवानों को इन वाहनों की भारी कमी से जूझना पड़ता है.

गृह मंत्रालय के अनुसार सीआरपीएफ में बारूदी सुरंग से सुरक्षित वा‍हनों यानी एमपीवी की स्वीकृत या प्राधिकृत संख्या 668 है लेकिन सीआरपीएफ के पास इनकी संख्या केवल 126 है. इसी तरह असम राइफल्स की स्वीकृत संख्या 92 के मुकाबले तेवल 28 एमपीवी हैं.


बीएसएफ के पास यह स्वीकृत संख्या 224 है लेकिन बारूदी सुरंग से सुरक्षित वा‍हनों की उपलब्ध संख्या केवल 24 है. इसकी तुलना में आईटीबीपी को 40 बारूदी सुरंगों से सुरक्षित वा‍हनों की तुलना में 20 बारूदी सुरंगों से सुरक्षित वा‍हन उपलब्ध हैं.

सीआईएसएफ को 10, एनएसजी को 16 और एसएसबी को 7 बारूदी सुरंगों से सुरक्षित वा‍हनों की स्वीकृति है लेकिन इनमें से किसी ने भी बारूदी सुरंगों से सुरक्षित वा‍हनों की खरीदी नहीं की है.

हालांकि राहत देने वाली बात ये है कि पिछले तीन सालों में सीआरपीएफ ने 20 बारूदी सुरंग से सुरक्षित वा‍हनों की खरीदी की है और 40 वाहन खरीदी की प्रक्रिया चल रही है. इसी तरह बीएसएफ 12, आईटीबीपी 12 और एसएसबी 7 बारूदी सुरंगों से सुरक्षित वा‍हनों की खरीदी की प्रक्रिया में है. जाहिर है, इन बारुदी सुरंगों से सुरक्षित वाहनों से जवान अलग-अलग मोर्चे पर बेहतर काम कर पायेंगे.

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