स्वास्थ्य की जानकारी दे रहा मोबाइल

नई दिल्ली | एजेंसी: देश के कई दूरदराज़ इलाकों में मोबाइल स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता फैलाने का कारगर साधन बन कर उभरा है, विशेषकर महिलाओं के लिए.

बिहार, हरियाणा और राजस्थान के दूरवर्ती जिलों की गर्भवती महिलाओं से लेकर सामुदायिक स्वास्थ्य सेवा के कर्मचारी और चाय की खेती करने वाले दक्षिण भारत के नीलगिरि पहाड़ी के क्षेत्र के निवासी और छत्तीसगढ़ के जंगली इलाके की महिलाओं के लिए मोबाइल एक मददगार साथी बन गया है.

राष्ट्रीय स्वास्थ्य प्रणाली के तहत मोबाइल का इस्तेमाल बच्चों को टीका लगाने जैसी चेतावनी और गर्भवती महिलाओं की समय पर जांच जैसे स्वास्थ्य संबंधी संदेश का प्रसार इन्हीं इलाकों में नहीं पूरे देश में हो रहा है और वह भी उन्हीं की भाषा में.

इस तरह के नए एप्लीकेशन का इस्तेमाल सामान्य मोबाइल फोन के साथ किया जा रहा है. जेएमक्यू डेवलपमेंट द्वारा तैयार वुमन मोबाइल लाइफलाइन चैनल एप्लीकेशन का इस्तेमाल ग्रामीण महिलाओं को सशक्त करने के लिए गैरसरकारी संस्था कर रही है.

हरियाणा के मेवात और राजस्थान के दूधा इलाके में मोबाइल एप्लीकेशन महिलाओं को मातृत्व स्वास्थ्य, बच्चों के असंक्रमीकरण, बच्चियों और किशोर लड़कियों के स्वास्थ्य की जानकारी उपलब्ध करा रही है.

जीएमक्यू डेवलपमेंट की हिल्मी कुरैशी ने बताया, “जमीनी स्तर पर महिलाओं के लिए ज्यादा सामग्री उपलब्ध नहीं है. पुरुषों को सिर्फ एक कैलकुलेटर की जरूरत होती है, जबकि महिलाओं को माहवारी, असंक्रमीकरण और गर्भावस्था से संबंधित कैलकुलेटर की जरूरत होती है. इसलिए यह एक एकीकृत समाधान है.”

यह एप्लीकेशन वॉइस संदेश के जरिए टीकाकरण और अन्य स्वास्थ्य संबंधी तारीख की याद दिलाती है.

कुरैशी ने कहा, “सिर्फ 15 महीने में हमें 35,000 उपभोक्ता मिले हैं जिनमें से 11,000 को गर्भावस्था और 8,000 को असंक्रमीकरण से जुड़े संदेश चाहिए. इसलिए, आप देख सकते हैं कि इसे कितने लोगों ने स्वीकारा है.”

इसी तरह एनजीओ बीबीसी मीडिया एक्शन ने बिहार के आठ जिले में ऐसे ही एप्लीकेशन पेश किए हैं. उनकी मोबाइल कुंजी और मोबाइल एकेडमी का इस्तेमाल बिहार की सामुदायिक स्वास्थ्यकर्मी महिलाओं एवं बच्चों की स्वास्थ्य सेवा के लिए कर रहे हैं.

बीबीसी मीडिया एक्शन के सिद्धार्थ स्वरूप ने बताया, “जब से मोबाइल फोन की पहुंच भारत की 70 फीसदी जनसंख्या तक हो गई, हमें भी मोबाइल फोन के जरिए नियत समय पर उचित सूचना देने का विचार आया.”

बीबीसी मीडिया एक्शन की तरह नीलगिरि इलाके में चाय की खेती करने वाले जरूरतमंद लोगों के लिए प्रोजेक्ट लीपफ्रांग एप्लीकेशन का इस्तेमाल किया जा रहा है. इन सभी उन्नत एप्लीकेशन को ‘वोडाफोन फाउंडेशन मोबाइल फॉर गुड अवार्ड्स’ के तहत 10 लाख रुपये दिए गए हैं.

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