रविवार को मोदी करेंगे ‘मन की बात’

नई दिल्ली | विशेष संवाददाता: प्रधानमंत्री मोदी हर रविवार को रेडियो के माध्यम से अपने ‘मन की बात’ किया करेंगे. शुक्रवार को प्रधानमंत्री मोदी ने इसकी शुरुआत की है. जाहिर सी बात है कि यदि प्रधानमंत्री स्वंय हर रविवार को रेडियो के माध्यम से जनता से बाते किया करेंगे तो टीवी तथा सोशल मीडिया के कारण गर्दिश में दिन बिताने वाले रेडियो के भी दिन फिरने जा रहें हैं. शुक्रवार को प्रधानमंत्री के द्वारा शुरु की गई इस नई शुरुआत से वे उन लोगों से भी जुड़ जायेंगे जिनका फेसबुक तथा ट्वीटर पर अकाउंट नहीं है. उल्लेखनीय है कि प्रधानमंत्री बनने के बाद मोदी ने जनता से जुड़ने के लिये कई नुस्खों का ईजाद किया है.

इससे पहले किसी प्रधानमंत्री ने शिक्षक दिवस के दिन देशभर के छात्रों को संबोधित नहीं किया था न ही किसी प्रधानमंत्री ने गांधी जयंती के दिन देशव्यापी स्वच्छता का अभियान छेड़ा था. इन दोनों कार्यक्रमों से उनकी कार्यप्रणाली की झलक मिलती है. जिसके तहत प्रधानमंत्री मोदी दिन पर दिन जनता से उनके समस्याओं के समाधान करते हुए जुड़ते जा रहें हैं. जाहिर सी बात है कि इसका लाभ उन्हें अगले लोकसभा चुनाव में मिलेगा. रेडियो के माध्यम से हर रविवार को ‘मन की बात’ करते समय मोदी, जनता के मन की बात को भी लोगों के सामने रखेंगे.


शुक्रवार को ‘मन की बात’ कार्यक्रम में उन्होंने बताया कि “मुझे लोगों के रोचक सुझाव मिले हैं. यह देश हर किसी का है, लोगों से जुड़ना आवश्यक है. किसी ने सुझाव दिया है कि कुटीर उद्योग पर जोर देना चाहिए, किसी और ने पांचवीं कक्षा के बाद परीक्षा आयोजित कराने के सुझाव दिए हैं.” उन्होंने कहा, “मैं लोगों से सबूत के साथ वास्तविक प्रेरक घटनाओं को मुझसे साझा करने की अपील करता हूं. मैं उसे देश के साथ साझा करूंगा.” प्रधानमंत्री ने कहा कि अगर हर व्यक्ति एक कदम साथ बढ़ाएगा तो देश सवा सौ करोड़ कदम आगे बढ़ जाएगा.

अपने ‘मन की बात’ के दौरान प्रधानमंत्री मोदी ने गांधी जी तथा विवेकानंद की बात करते हुए कहा कि “हम जब महात्मा गांधी की बात करते हैं, तो खादी की बात बहुत स्वाभाविक ध्यान में आती है. आपके परिवार में अनेक प्रकार के वस्त्र होंगे, अनेक प्रकार के वस्त्र होंगे, अनेक प्रकार के फैब्रिक्स होंगे, अनेक कंपनियों के products होंगे, क्या उसमें एक खादी का नहीं हो सकता क्या…”

उन्होंने ‘मन की बात’ के माध्यम से लोगों से कहा कि “मैं अपको खादीधारी बनने के लिए नहीं कह रहा, आप पूर्ण खादीधारी होने का व्रत करें, ये भी नहीं कह रहा. मैं सिर्फ इतना कहता हूं कि कम से कम एक चीज, भले ही वह हैंडकरचीफ, भले घर में नहाने का तौलिया हो, भले हो सकता है बैडशीट हो, तकिए का कबर हो, पर्दा हो, कुछ तो भी हो, अगर परिवार में हर प्रकार के फैब्रिक्स का शौक है, हर प्रकार के कपड़ों का शौक है, तो ये नियमित होना चाहिए और ये मैं इसलिए कह रहा हूं कि अगर आप खादी का वस्त्र खरीदते हैं तो एक गरीब के घर में दीवाली का दीया जलता है.”

प्रधानमंत्री मोदी ने स्वामी विवेकानंद के विचारों को अपने रेडियो कार्यक्रम ‘मन की बात’ के माध्यम से जनता को बताता कि “स्वामी विवेकानंद जी यही कहते थे. मेरे देशवासियों, सवा सौ करोड़ देशवासियों के भीतर अपार शक्ति है, अपार सामर्थ्य है. हमें अपने आपको पहचानने की जरूरत है. हमारे भीतर की ताकत को पहचानने की जरूरत है और फिर जैसा स्वामी विवेकानंदजी ने कहा था उस आत्म-सम्मान को ले करके, अपनी सही पहचान को ले करके हम चल पड़ेंगे, तो विजयी होंगे और हमारा राष्ट्र भी विजयी होगा, सफल होगा.”

प्रधानमंत्री मोदी के बातों से इस बात का स्पष्ट संकेत मिलता है उनके कार्यकाल में भारतीय महापुरुषों के विचारों के साथ सरकारी कार्यक्रमों को जोड़कर जनता के सामने रखा जायेगा. जिससे उस कार्यक्रम को जमीना हकीकत में बदलने में आसानी होगी.

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