भाजपा में मोदी-शाह युग का आगाज़

नई दिल्ली | विशेष संवाददाता: अमित शाह भाजपा संगठन के शीर्ष सिंहासन तक पहुंचे. इसी के साथ भाजपा में अटल-आडवाणी युग का समापन हो गया है. नरेन्द्र मोदी का अपने तमाम विरोधियों को दरकिनार कर प्रधानमंत्री बनना इस बात का संकेत था कि भाजपा में नये युग का आगाज़ होने वाला है.

बुधवार को भाजपा संसदीय बोर्ड द्वारा महासचिव अमित शाह को पार्टी अध्यक्ष बनाये जाने के बाद कहा जा सकता है कि भाजपा में मोदी-शाह युग का आगाज़ हो गया है.


अटल-आडवाणी के नेतृत्व में भाजपा ने विपक्ष की भूमिका का निबाह बखूबी किया तथा केन्द्र में सहयोगी दलों की मदद से सरकार भी बनाई थी. इसके बावजूद अटल-आडवाणी के नेतृत्व में वह सब कुछ नहीं किया जा सका जो संघ चाहता था.

संघ के सपने को पूरा करने के लिये भाजपा को संसदीय व्यवस्था में स्पष्ट बहुमत की आवश्यकता थी जिसे मोदी-शाह की जोड़ी ने संभव कर दिखाया है.

देश के इतिहास में यह पहली बार हुआ है कि किसी गैर-कांग्रेसी राजनीतिक दल ने अपने बूते पर 272 का आकड़ा पार किया है. जाहिर है कि इस समय भाजपा अपने पूरे उफान पर है तथा इसके विजय यात्रा को जारी रखने के लिये एक ऐसी जोड़ी की जरूरत थी जो अटल-आडवाणी के प्रभामंडल अलग हटकर काम करने का माद्दा रखता हो.

यही कारण है कि भाजपा ने देश के राजनीति के इतिहास में पहली बार इतने आक्रमक ढंग से चुनाव प्रचार छेड़ा था. 2014 के लोकसभा चुनाव में भाजपा में मोदी-शाह की जोड़ी ने हर मुमकिन सूचना तकनीक का उपयोग कर पार्टी को विजयी बनाया है.

1997 में पहली बार गुजरात विधानसभा पहुंचे अमित शाह को क्रिकेट खेलने, पढ़ने और समाज सेवा करने का शौक है. साल दर साल अमित शाह गुजरात में मोदी के सबसे करीबी राजनीतिक सहयोगी साबित हुए हैं.

मोदी को भाजपा के प्रधानमंत्री पद का उम्मीदवार घोषित किए जाने के बाद उन्होंने अमित शाह को उत्तर प्रदेश का प्रभारी बनाना तय किया था. आज वही अमित शाह भाजपा के अध्यक्ष बन गये हैं, इसे भाजपा में मोदी-शाह युग का आगाज़ माना जा रहा है.

मोदी-शाह युग में भाजपा का कायाकल्प होगा ऐसा जानकारों का मानना है.

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