नक्सलवाद पर नई फिल्म माटी के लाल

रायपुर | विशेष संवाददाता: नक्सल आंदोलन पर संजय काक की फिल्म ‘माटी के लाल’ की स्क्रिनिंग 7 मई को दिल्ली में होगी. संजय काक पिछले कई सालों से इस फिल्म में जुटे हुये थे. 2 घंटे की इस फिल्म में छत्तीसगढ़, ओडीशा और पंजाब में हो रहे जनसंघर्ष को दर्शाया गया है. संजय काक की यह फिल्म प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह द्वारा नक्सलवाद को देश की सबसे बड़ी आंतरिक चुनौती बताये जाने जैसे कई सवालों से मुठभेड़ करती है. फिल्म का एक बड़ा हिस्सा बस्तर पर केंद्रीत है.

पुणे में जन्मे संजय काक मूलत कश्मीरी पंडित हैं. संजय काक ने इससे पहले नर्मदा आंदोलन पर ‘वर्ड्‌स ऑन वाटर’ और कश्मीर समस्या पर ‘जश्ने आजादी’ जैसी बहुचर्चित डॉक्यूमेंट्री फिल्में बनायी हैं. ‘इन द फॉरेस्ट हैंग्स अ ब्रिज’, ‘वन वेपन’ और ‘हार्वेस्ट ऑफ रेन’ जैसी उनकी फिल्मों को भी दुनिया भर में सराहा गया है. इन फिल्मों को कई प्रतिष्ठित सम्मान और पुरस्कार भी मिले हैं.


अपनी ताजा फिल्म ‘माटी के लाल’ को लेकर संजय काक का कहना है कि हमारे समय के अधिकांश गंभीर मुद्दों पर कथित मुख्यधारा का सिनेमा खामोशी अपनाये रखता है. डाक्यूमेंटरी फिल्मों ने इसी खामोशी को तोड़ने की कोशिश की है.

संजय काक का कहना है कि बॉलीवुड की फिल्मों में जो लोग 40-50 करोड़ लगाते हैं, वे कोई जोखिम नहीं ले सकते. उनके लिये हरेक फिल्म का विषय केवल स्वाद और सनसनी का मुद्दा है. लेकिन हमारे जैसे फिल्मकारों के लिये ऐसा नहीं है.

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