शिवराज सरकार का बजट महंगाई बढ़ाने वाला

भोपाल | समाचार डेस्क: मध्यप्रदेश सरकार का बजट प्रदेश के पिछड़ेपन को महिमामंडित करने वाला बजट ही नहीं बल्कि इसे मंहगाई और गरीबी की गर्त में ले जाने वाला बजट है. खुद बजट मानता है कि भाजपा कार्यकाल में प्रदेश पर कर्ज का बोझ बढ़कर एक लाख 72 हजार करोड़ हो गया है वहीँ प्रति व्यक्ति आय के मामले में मध्यप्रदेश राष्ट्रीय औसत आय की तुलना में बहुत पीछे छूट गया है. इस बात की जानकारी मध्य प्रदेश माकपा के राज्य सचिव बादल सरोज ने शिवराज सरकार के बजट पर एक बयान में कहा.

लगातार सूखे और प्राकृतिक आपदाओं के संकट, किसान आत्महत्याओं के विकराल काल में भाजपा सरकार किसानों के 50 हजार तक के कर्ज माफ करने और ईमानदारी से मुआवजा बाटने की बात को भी भूल गई है. अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर कच्चे तेल की कीमतों में 5 सौ प्रतिशत की कमी के बाद भी राज्य सरकार ने पेट्रोल, डीजल पर वैट न कम करके किसानों और आम उपभोक्ताओं पर कर के बोझ को हल्का नहीं किया है. जाहिर है कि इस बजट में कृषि संकट और बढ़ेगा.


प्रदेश सरकार के बजट में न तो युवाओं को रोजगार देने को कोई सचेतन प्रयास है और न ही यह बताया गया है कि अभी तक की इन्वेस्टर्स मीट से प्रदेश में कितना निवेश हुआ है. हालांकि इन तमाशों की असफलता वित्त मंत्री ने यह कहकर स्वयं स्वीकार की है कि निवेशक आकर्षित नहीं हो पा रहे हैं.

मेहनतकशों के लिए तो इस बजट में झुनझुना तक नहीं है. दैनिक वेतन भोगी कर्मचारियों, आशा-उषा, आंगनवाड़ी कर्मियों, अध्यापकों के विविध रूपों को स्थाई करने की बात तो छोडियें, सातवें वेतन आयोग से राज्य कर्मचारियों को मिलने वाले लाभ के अनुमान तक का जिक्र नहीं है.

जैंडर बजट के हिसाब से महिला विरोधी और दलित आदिवासियों के खाली पदों को न भरने और उनके उत्थान की दृष्टि से कोई योजना न लाने वाला यह शुद्ध मनुवादी बजट है. इन वर्गों की शिक्षा, स्वास्थ्य और सुरक्षा की चिंता भी इस बजट में नहीं की गई.

यह बजट केन्द्र सरकार द्वारा मनरेगा सहित 13700 करोड़ की कल्याण योजनाओं की राशि से मध्यप्रदेश को वंचित कर देने पर भी खामोश है.

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