मप्र का वित्तीय समावेशन रोल मॉडल

भोपाल | एजेंसी: मध्य प्रदेश देश का वित्तीय समावेशन देश के लिये रोल माडल बन गया है. मध्य प्रदेश के सुदूर ग्रामीण अंचलों तक बैंकिग सुविधाएं और उनसे मिलने वाले लाभ ग्रामीणों को मुहैया कराने के लिए राज्य में शुरू किए गए वित्तीय समावेशन मडल ‘समृद्घि’ को अब भारत सरकार द्वारा देश में ‘संपूर्ण वित्तीय समावेशन योजना’ के रूप में लागू किया जा रहा है.

राज्य के इस मॉडल में यह तय किया गया है कि ग्रामीणों को उनके घरों के पांच किलोमीटर के दायरे में ही बैंकिग सुविधाओं का लाभ मिले. इसलिये राज्य के 14 हजार 697 ऐसे गांव, जहां 20 से 70 किलोमीटर की दूरी पर बैंकिग सुविधाओं का अभाव था, को चिन्हाकित किया गया और इन गांव में ग्रामीणों को घरों के नजदीक बैंकिग सुविधा के मकसद से 2998 अल्ट्रा-स्मॉल बैंक खोलने की मुहिम शुरू की गई. अब तक 2400 से अधिक छोटे-छोटे गांव में खुल चुके इन बैंकों ने करीब 1800 करोड़ से अधिक का कारोबार किया है.


ग्रामीणों के रोजमर्रा के बैंकिंग काम-काज के साथ अब इन बैंकों से केन्द्र और राज्य की हितग्राही योजनाओं का लाभ भी जरूरतमंद लोगों को आसानी से मिलने लगा है. हितग्राहियों के बैंक खातों में प्रत्यक्ष लाभ का हस्तांतरण हो रहा है.

आधिकारिक तौर पर जनसंपर्क विभाग द्वारा जारी विज्ञप्ति में बताया गया है कि समृद्घि मडल की अभूतपूर्व सफलता और इन बैंकों द्वारा निरंतर करोड़ों रुपये के कारोबार से अब ग्रामीण बैंकिग को नई दिशा मिली है. इस अनूठी सफलता से बैंकों की यह धारणा भी निर्मूल साबित हुई है कि गांवों में बैंक खोलने का काम फायदेमंद नहीं है. सभी महत्वपूर्ण बैंक संस्थानों में अब मध्यप्रदेश के ग्रामीण अंचलों में अल्ट्रा-स्माल बैंक खोलने की प्रतिस्पर्धा है.

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