व्यापमं की जांच CBI नहीं STF करेगी

जबलपुर | एजेंसी: जबलपुर हाई कोर्ट ने बुधवार को निर्णय दिया है कि व्यापमं की जांच अब एसटीएफ करेगी. एसटीएफ के जांच की निगरानी एसआईटी करेगी. इसी के साथ जबलपुर हाई कोर्ट ने कांग्रेस द्वारा व्यापमं घोटाले की जांच सीबीआई से कराने की याचिका को खारिज कर दिया है. अब एसटीएफ की जांच एसआईटी की निगरानी में होगी. कांग्रेस महासचिव एवं प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह, कांग्रेस पार्षद राजेश सोनकर व अन्य सात की तरफ से उच्च न्यायालय में व्यापमं फर्जीवाड़े की सीबीआई से जांच कराने की मांग को लेकर याचिका दायर की गई थी. उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश अजय मानिकराव खानविलकर व न्यायाधीश आलोक अराधे की खंडपीठ ने याचिकाओं का निराकरण इस आदेश के साथ किया कि जांच एसटीएफ करेगी पर जांच एसआईटी की निगरानी में होगी.

न्यायालय द्वारा गठित एसआईटी के चेयरमैन उच्च न्यायालय के सेवानिवृत्त न्यायाधीश होंगे तथा सदस्य सेवानिवृत्त भारतीय पुलिस सेवा के अधिकारी व सूचना प्रौद्योगिकी विशेषज्ञ होंगे. सेवानिवृत्त आईपीएस अधिकारी अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक के पद से कम नहीं होंगे.


खंडपीठ ने अपने 92 पृष्ठ के आदेश में कहा है कि एसआईटी का गठन सात नवम्बर को किया जाएगा. एसटीएफ को दो सप्ताह में अभी तक की कार्यवाही के समस्त दस्तावेज एसआईटी को उपलब्ध कराने होंगे. निर्धारित समय सीमा में दस्तावेज उपलब्ध नहीं कराए जाते हैं तो इसकी जबावदेही मुख्य सचिव की होगी.

एसटीएफ जांच के सभी दस्तावेज एसआईटी को उपलब्ध कराएगी और उनके निर्देश पर कार्यवाही करेगी. इसके अलावा एसटीएफ मीडिया रिपोर्ट के आधार पर भी जांच कर सकती है.

दायर याचिकाओं में कहा गया था कि राज्य सरकार, व्यापमं व एसटीएफ का पक्ष एक ही अधिवक्ता के द्वारा न्यायालय में प्रस्तुत किया जा रहा है. इसके अलावा पूछताछ में नाम आने के बावजूद आरएसएस व भाजपा नेताओं को एसटीएफ ने गिरफ्तार नहीं किया है. छात्र-छात्राओं व उनके अभिभावकों को गिरफ्तार किया जा रहा है. जबकि उन्हें सरकारी गवाह बनाया जाना चाहिए था.

एसटीएफ की जांच पर आपत्ति उठाते हुए याचिकाकर्ताओं की तरफ से कहा गया था कि दो भाजपा नेताओं के बच्चों के नाम भी फर्जीवाड़े में आए परंतु उनके खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की गई. इतना ही नहीं नितिन महेन्द्र के पास से जो एक्सल सीट बरामद हुई थी उसमें कई बार केंद्रीय मंत्री उमा भारती का नाम भी आया था. एसटीएफ ने अपनी जांच में मुख्यमंत्री कार्यालय को भी क्लीन चीट दी है. एसटीएफ गृह विभाग का अंग है इसलिए मामलें की निष्पक्ष जांच की मांग याचिकाकर्ताओं की तरफ से की गई थी.

खंडपीठ ने सात अक्टूबर को जांच के बाद फैसला सुरक्षित रखने के आदेश जारी किए थे. याचिकाकर्ताओं की तरफ से अधिवक्ता केटीएस तुलसी, इंदिरा जयसिंह, विवेक तन्खा, राजेन्द्र तिवारी और सरकार व एसटीएफ की तरफ से अधिवक्ता नागेश्वर राव व महाधिवत्ता आरडी जैन ने पक्ष रखा.

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