मुफ्ती के बयान पर संसद में बवाल

नई दिल्ली | समाचार डेस्क: जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री मुफ्ती मोहम्मद सईद के विवादास्पद बयान से संसद में भाजपा तथा सरकार को फजीहत का सामना करना पड़ा. उल्लेखनीय है कि मुफ्ती ने जम्मू-कश्मीर में शांतिपूर्ण चुनाव के लिये पाकिस्तान तथा आतंकवादियों को श्रेय दिया था. जाहिर है कि केन्द्र में सरकार चलाने वाली भाजपा तथा केन्द्र सरकार ने इससे पल्ला झाड़ लिया. विवादित बयान देने के बाद मुफ्ती ने कहा था कि उन्होंने अपने विचारों से प्रधानमंत्री मोदी को भी अवगत कर दिया था. इसी कारण से गृह मंत्री राजनाथ सिंह ने साफ किया उन्होंने प्रधानमंत्री मोदी से बात करने के बाद ही अपना बयान दिया है कि इससे केन्द्र सरकार तथा भाजपा का कोई लेना-देना नहीं है. केंद्रीय गृह मंत्री राजनाथ सिंह ने सोमवार को कहा कि जम्मू एवं कश्मीर के मुख्यमंत्री मुफ्ती मोहम्मद सईद के उस बयान से केंद्र सरकार और भारतीय जनता पार्टी का कोई लेना-देना नहीं है, जिसमें उन्होंने राज्य विधानसभा चुनाव शांतिपूर्ण संपन्न होने का श्रेय आतंकवादी गुटों और पाकिस्तान को दिया था. कांग्रेस और विपक्षी पार्टियों ने इस मुद्दे पर उचित प्रस्ताव की मांग को लेकर लोकसभा से बहिर्गमन कर दिया.

लोकसभा में प्रश्नकाल के बाद मुद्दे को उठाते हुए कांग्रेस सदस्य के. सी. वेणुगोपाल ने सईद के बयान की निंदा की. विपक्षी दलों ने भी मुद्दे पर प्रधानमंत्री से स्पष्टीरकरण मांगा.


वेणुगोपाल ने कहा कि सईद ने कहा है कि उन्होंने मोदी को अपने विचारों से अवगत कराया था. मोदी रविवार को जम्मू एवं कश्मीर में पीपुल्स डेमोकेट्रिक पार्टी, पीडीपी एवं भाजपा गठबंधन सरकार के शपथ समारोह में शामिल हुए थे.

वेणुगोपाल ने कहा कि राज्य में शांतिपूर्ण चुनाव का श्रेय सुरक्षा बलों और राज्य की जनता को मिलना चाहिए.

उन्होंने कहा, “हमें आशा है कि प्रधानमंत्री इस मुद्दे पर स्पष्टीकरण देंगे.”

राजनाथ ने कहा, “केंद्र सरकार और भाजपा का इस बयान से कोई वास्ता नहीं है.” उन्होंने विपक्षी पार्टियों से कहा कि प्रधानमंत्री से बात करने के बाद ही वह सदन में आए हैं.

राजनाथ ने कहा, “मैं जो कुछ भी कह रहा हूं, वह सोच समझकर और प्रधानमंत्री की सहमति से कह रहा है.”

उन्होंने कहा, “मैं शांतिपूर्ण चुनाव का श्रेय निर्वाचन आयोग, सशस्त्र बलों और अर्धसैनिक बलों को देना चाहता हूं.”

मंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री और जम्मू एवं कश्मीर के मुख्यमंत्री के बीच कोई गुप्त वार्ता और किसी भी विवादास्पद मुद्दे पर चर्चा नहीं हुई थी.

सईद ने रविवार को बयान दिया था कि सीमा पार के लोगों की वजह से राज्य में विधानसभा चुनाव शांतिपूर्ण तरीके से संपन्न हो पाए. उन्होंने हुर्रियत और आतंकवादी गुटों को भी शांतिपूर्ण चुनाव का श्रेय देते हुए कहा कि उन्होंने बाधा पहुंचाई होती तो लोगों की बड़ी भागीदारी के साथ शांतिपूर्ण चुनाव संपन्न नहीं हो पाते. सईद के इस बयान ने देश की राजनीति में विवाद खड़ा कर दिया.

लोकसभा में कांग्रेस नेता मल्लिकार्जुन खड़गे ने कहा कि सरकार को जम्मू एवं कश्मीर के नए मुख्यमंत्री को उनके विवादास्पद बयान के लिए नोटिस भेजने का प्रस्ताव लाना चाहिए.

उन्होंने कहा, “उन्हें पता चलेगा कि पूरा सदन उनके बयान के खिलाफ है. शांतिपूर्ण चुनाव राज्य की जनता और सरकार के अधिकारियों के कारण संपन्न हो पाए हैं, लेकिन उनका कहना है कि यह पाकिस्तान की वजह से है.”

समाजवादी पार्टी प्रमुख मुलायम सिंह यादव ने भी इस मुद्दे पर प्रधानमंत्री से स्पष्टीकरण मांगा है, लेकिन राजनाथ का कहना है कि स्पष्टीकरण देने का सवाल ही नहीं उठता है.

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