कांठ: अदालत ने प्रशासन का अधिकार माना

लखनऊ | समाचार डेस्क: उच्च न्यायालय ने कहा कि कांठ में लाऊडस्पीकर लगाने का अधिकार जिला प्रशासन को है. इससे कांठ के नयागांव अकबरपुर चेंदरी में मंदिर पर लाउडस्पीकर लगाने की मांग कर रही भाजपा तथा वीएचपी के सामने नई अड़चन खड़ी हो गई है.

शनिवार को इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने कांठ के नयागांव अकबरपुर चेंदरी में मंदिर पर लाउडस्पीकर लगाने की मांग को लेकर दाखिल जनहित याचिका को खारिज करते हुए कहा कि इसका फैसला करने का अधिकार जिला प्रशासन को है.

गौरतलब है कि उच्च न्यायालय के न्यायाधीश न्यायमूर्ति दिलीप गुप्ता व न्यायमूर्ति एमसी त्रिपाठी की खंडपीठ ने इस याचिका पर मंगलवार को अपना निर्णय सुरक्षित कर लिया था. शनिवार को अदालत ने चुन्नू सिंह और 10 अन्य लोगों की दाखिल याचिका पर अपना यह फैसला सुनाया. याचिका में मांग की गई है कि लाउड स्पीकर लगाने की अनुमति दी जाए.

गौरतलब है कि कांठ में चार जुलाई को बवाल के बाद सियासी हठ के कारण यह कस्बा फिर संवेदनशील हो गया है. मुरादाबाद में धारा 144 लागू है. हर सीमा पर बैरियर लगाए गए हैं और तलाशी के बाद ही लोगों को जिले की सीमा में प्रवेश दिया जा रहा है. आस-पास के जिलों में सुरक्षा व्यवस्था दुरुस्त करने के लिए 14 कंपनी अतिरिक्त पीएसी दी गई है.

वहीं, शनिवार को उत्तर प्रदेश में मुरादाबाद के कांठ विवाद को लेकर भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष लक्ष्मीकांत वाजपेयी समेत कई नेता मुरादाबाद जिलाधिकारी के आवास के बाहर धरने पर बैठ गए थे. भाजपा कांठ विवाद को लेकर मुरादाबाद के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक धर्मवीर सिंह के निलंबन व पुलिसकर्मियों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराने की जिद पर अड़ी है.

भाजपा के प्रदर्शन को देखते हुए जिला प्रशासन ने इलाके में धारा 144 लगा दी है. प्रदर्शनकारियों को रोकने के लिए कांठ जाने वाले सभी रास्तों पर भारी पुलिस बल तैनात कर दिए गए हैं. जगह-जगह सुरक्षाकर्मियों की तैनाती की गई है. पुलिस ने भाजपा सांसद राजेंद्र अग्रवाल और विधायक संगीत सोम को नजरबंद कर दिया है. इन नेताओं के घर के बाहर भारी पुलिस बल तैनात है.

पुलिस के चौकन्ना रहते हुए भी भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष लक्ष्मीकांत वाजपेयी मुरादाबाद पहुंच गए. वह पार्टी के कई नेताओं के साथ जिलाधिकारी के यहां धरना दे रहे थे. इस बीच खबर है कि दो विधायक सुरेश राणा और लोकेंद्र चौहान कांठ थाने पहुंचने में सफल हो गए. दोनों विधायकों ने पुलिसकर्मियों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कराने के लिए थाने पर तहरीर दे दी है.

थाने पहुंचने पर दोनों विधायकों को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया, लेकिन थोड़ी देर बाद उन्हें छोड़ दिया गया. लक्ष्मीकांत वाजपेयी ने प्रशासन के इस फैसले का विरोध किया है.

उन्होंने कहा कि भाजपा लोकतांत्रिक तरीके से कांठ मामले का विरोध करना चाहती है. तीन-चार लोगों के साथ जाकर वह बस एसएसपी के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराना चाहते हैं.

उधर, कांठ बवाल को लेकर कांग्रेस की तरफ से निकाले जाने वाले शांति मार्च को पुलिस ने गाजियाबाद सीमा पर रोक दिया है.

कांग्रेस महासचिव मधुसूदन मिस्त्री, प्रदेश अध्यक्ष निर्मल खत्री, और नगमा समेत कई अन्य नेता अपने समर्थकों के साथ मुरादाबाद जाना चाह रहे थे. पूर्व प्रदेश अध्यक्ष रीता बहुगुणा जोशी को भी मुरादाबाद पहुंचने से रोकने के लिए नजरबंद करके रखा गया है.

सूबे के मुख्य सचिव आलोक रंजन ने मुरादाबाद में हालात से निपटने के लिए आपात बैठक बुलाई है. इसमें डीजीपी और एडीजी सहित कई आला अधिकारियों के साथ कांठ मुद्दे पर चर्चा की जा रही है. कई अधिकारियों को मौके पर जाने के निर्देश भी दिए गए हैं.

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