मुजफ्फरनगर में हिंसा के बाद कर्फ्यू

लखनऊ: उत्तर प्रदेश के मुजफफरनगर में हुई हिंसा में अब तक 10 लोग मारे गये हैं. पुलिस का कहना है कि शनिवार देर शाम भड़की सांप्रदायिक हिंसा में कम से कम 10 लोगों की मृत्यु हो गई है.इसके अलावा अलग-अलग स्थानों पर हुई चाकूबाजी और फायरिंग में कम से कम 35 लोगों के घायल होने की पुष्टि हुई है.

घटना के बाद पूरे प्रदेश में हाई अलर्ट घोषित कर दिया गया है और जिले में कर्फ्यू लगा दिया गया है. हिंसा को काबू में करने के लिए सेना की मदद ली जा रही है.

दरअसल 27 अगस्त को जिले के कवाल गांव में एक लड़की से छेड़छाड़ के मामले के बाद हिंसा में उसके दो भाईयों की हत्या कर दी गई थी जिसके बाद से ही इलाके में तनाव व्याप्त था लेकिन राज्य सरकार ने मामले की गंभीरता को नहीं समझा और लापरवाह बनी रही.

इसी क्रम में शनिवार को आहूत महापंचायत के बाद लौट रही भीड़ पर शरारती तत्वों द्वारा पथराव किए जाने की घटना ने धीरे-धीरे सांप्रदायिक हिंसा का रूप ले लिया. इसके बाद हिंसा जिले के शहरी एवं ग्रामीण इलाकों में तेजी से फैल गयी.

हिंसा की कवरेज कर रहे एक टीवी पत्रकार की भी गोली मारकर हत्या कर दी गई जबकि एक अन्य स्वतंत्र पत्रकार को भी गोली लगी है. इसके अलावा हिंसा का असर आसपास के जिलों पर भी पड़ा है.

हिंसा भड़कने के बाद शनिवार देर रात मुख्यमंत्री ने आला अधिकारियों के साथ बैठक कर स्थिति पर चर्चा की और अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिया कि किसी भी हालत में उपद्रवियों को बक्शा न जाए और जिले में शांति व्यवस्था तत्काल बहाल की जाए.मुख्यमंत्री ने पुलिस महानिरीक्षक सहित कई बड़े अधिकारियों को जिले में कैंप करने को कहा है.

शासन के सूत्रों की मानें तो मुजफफरनगर में फैली हिंसा में बड़े अधिकारियों की विफलता को लेकर मुख्यमंत्री खासे नाराज हैं और ऐसी सम्भावना जतायी जा रही है कि जिले के पुलिस अधीक्षक और जिलाधिकारी पर कार्रवाई की जा सकती है.

राज्य सरकार ने मुजफफनगर जिले में भड़की हिंसा की गम्भीरता को देखते हुए पूरे प्रदेश में अलर्ट घोषित कर दिया है. 28 अतिरिक्त कम्पनियों को प्रदेश के विभिन्न अति संवेदनशील हिस्सों में तैनात किया गया है.


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