बिहार संकट जदयू की देन: नायडू

नई दिल्ली | समाचार डेस्क: संसदीय कार्यमंत्री एम. वेंकैया नायडू ने रविवार को कहा कि बिहार संकट जदयू के भीतरी गुटबाजी का नतीजा है इसमें प्रधानमंत्री मोदी की कोई भूमिका नहीं है. नायडु ने जदयू को एक विभाजित पार्टी कहा जिसके कारण बिहार में राजनीतिक संकट उत्पन्न हो गया है. एम. वेंकैया नायडू ने कहा नीतीश अपनी विफलताओं को प्रदानमंत्री मोदी पर थोप रहें हैं. बिहार में सत्ताधारी जनता दल युनाइटेड में दो गुटों के बीच घमासान से उत्पन्न हुए राजनीतिक संकट पर आरोप-प्रत्यारोप और सफाई देने का दौर जारी है. इस प्रकरण पर विपक्षी पार्टी भारतीय जनता पार्टी पर जहां नीतीश गुट का आरोपों का प्रहार जारी है वहीं अब विधानसभा में उसकी हैसियत पर खतरे की तलवार टांकने की भी कोशिश की गई है.

रविवार को केंद्रीय संसदीय कार्यमंत्री एम. वेंकैया नायडू को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का बचाव करते हुए यह कहना पड़ा है कि बिहार के राजनीतिक संकट में उनकी कोई भूमिका नहीं है. भाजपा की प्रदेश इकाई ने जदयू नीतीश गुट को मुख्य विपक्षी दल माने जाने के फैसले को अदालत में चुनौती देने की चेतावनी दी है.

नायडू ने रविवार को हैदराबाद में संवाददाताओं को सफाई देते हुए कहा केंद्र सरकार या प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की बिहार में उत्पन्न राजनीतिक संकट में कोई भूमिका नहीं है.

उन्होंने कहा, “जनता दल युनाइटेड के भीतर चल रहे घमासान के कारण यह संकट उत्पन्न हुआ है. जनता परिवार में युद्ध जारी है. वे विभाजित हैं, एकजुट नहीं रहे.”

भाजपा नेता ने आरोप लगाया कि जदयू और नीतीश कुमार अपनी विफलताओं के लिए मोदी पर आरोप लगा रहे हैं.

उन्होंने कहा, “किसने आपको मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा देने के लिए कहा था और किसने आपको जीतन राम मांझी को मुख्यमंत्री बनाने के लिए कहा था और अब आप उन्हें इस्तीफा देने के लिए क्यों कह रहे हैं.”

नायडू ने इस बात से भी इंकार किया कि विधानसभा में मांझी के बहुमत साबित करने के लिए 20 फरवरी का दिन तय करने में केंद्र सरकार की कोई भूमिका है. उन्होंने कहा कि विधानसभा का सत्र शुरू करने की तिथि के संबंध में 12 दिनों पूर्व फैसला किया गया और राज्यपाल ने इस काम के लिए उसी दिन को निर्धारित किया है.

उधर पटना में भाजपा की प्रदेश इकाई को अपनी हैसियत की चिंता ने घेर लिया है. जदयू को विधानसभा में मुख्य विरोधी दल की मान्यता दिए जाने के खतरे को भांप भाजपा ने कहा है कि इस तरह का फैसला लिया गया तो वह उसे अदालत में चुनौती देगी.

जदयू ने मुख्यमंत्री जीतन राम मांझी को दल से असंबद्ध करार देते हुए विधानसभा में नीतीश गुट को मुख्य विपक्षी दल बनाने की मांग की है. पार्टी ने कहा कि उसके नेता नीतीश कुमार बनाए गए हैं, जबकि सरकार मांझी चला रहे हैं और उन्हें विधानसभा में किसी भी पार्टी का समर्थन हासिल नहीं है.

जटिल विधायी मुद्दों पर विचार के लिए विधानसभा अध्यक्ष उदय नारायण चौधरी ने सभी दलों की बैठक बुलाई है. इसी बैठक में नीतीश कुमार समर्थक जदयू गुट की मांग पर भी विचार किया जाएगा.

विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष और भाजपा नेता नंदकिशोर यादव ने कहा कि जदयू विभाजित हो गया है और इन गुटों का नेतृत्व जीतन राम मांझी और नीतीश कुमार कर रहे हैं. दोनों ने बहुमत होने का दावा किया है. दोनों में से किसका दावा सही है इसका फैसला तो इसी महीने 20 तारीख को तब होगा जब मुख्यमंत्री विधानसभा सदन में विश्वास मत प्रस्ताव पेश करेंगे. इसके पहले विपक्षी दल के रूप में किसी और को मान्यता दिया जाना गैरकानूनी होगा.

भाजपा ने कहा है कि यदि विधानसभा अध्यक्ष ने सत्ताधारी जदयू को विपक्षी पार्टी होने का दर्जा दिया तो वह इस फैसले को अदालत में चुनौती देगी.

इस बीच खुद को हीरो बनाने में जुटे बिहार के मुख्यमंत्री जीतन राम मांझी ने पासवान जाति को महादलित वर्ग में शामिल करने संबंधी एक प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है. इस मंजूरी के बाद अब बिहार में दलित वर्ग में कोई भी जाति नहीं है.

इस संबंध में फैसला शनिवार को मांझी की अध्यक्षता में हुई मंत्रिमंडल की बैठक में लिया गया था.

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