नकिया कोल ब्लॉक को ग्रामीणों की ना

कोरबा | अब्दुल असलम: कोरबा के नकिया इलाके में कोल ब्लॉक का भारी विरोध जारी है. छत्तीसगढ़ केप्टिव कोल माईनिंग लिमिटेड के लिये ज़िला प्रशासन सारे नियम-कानून को ताक पर रख कर जनसुनवाई करवा रहा है लेकिन गांव के लोग लामबंद हैं और सरकारी अफसर बैकफुट पर. गांव वालों की असहमति के बाद भी कागजों में खेल जारी है. जाहिर है, अनपढ़ और भोले-भाले आदिवासियों पर सरकारी लालफीताशाही भारी है.ग्रामीण कोल ब्लॉक के लिये ‘ना’ कह रहे हैं, अफसर दावा करते हैं कि गांव वाले राजी हैं.

सरकारी अफसर किस हद तक जनसुनवाई के लिये आमादा हैं, इसे इस बात से समझा जा सकता है कि गांवों में हुई जनसुनवाई की अफसरों ने वीडियो रिकार्डिंग भी नहीं करवाई है. ग्राम सभा के सरकारी नियमों को ताक पर रखने के कई और नमूने इन जनसुनवाई में देखे जा सकते हैं. दूसरी ओर कोरबा के सांसद और केंद्रीय मंत्री चरणदास महंत भी कोल ब्लॉक के खिलाफ ताल ठोंक कर मैदान में नज़र आ रहे हैं.

नकिया कोल ब्लाक का आवंटन जनवरी 2006 में छत्तीसगढ़ केप्टिव कोल माईनिंग लिमिटेड को किया था. प्रदेश के छह औद्योगिक घरानों के समूह ने कंपनी बनाकर नकिया कोल ब्लाक प्राप्त किया था. इस समूह में इस्पात गोदावरी, इंडो एग्रो सेनेरजी,जे आर पावर जेन लिमिटेड, नाकोडा इस्पात, वंदना ग्लोबल, बजरंग पांवर एंड इस्पात शामिल है. कोल ब्लाक का 1579 हेक्टेयर लीज एरिया घने वन से घिरा है. इस कोल ब्लॉक के लिये दो गांवों में जनसुनावई हो चुकी है और दो गांवों में जनसुनवाई होनी बची हुई है.

कोरबा में छत्तीसगढ़ केप्टिव कोल माईनिंग लिमिटेड को दूसरी बार गामीणो ने झटका दिया है. नकिया पंचायत के चार गांव में नकिया कोल ब्लाक के लिये की जा रही ग्राम सभा में ग्राम रपता के ग्रामीणो के विरोध के बाद अब पेंडाडीह गांव के संरक्षित जनजाति पहाडी कोरवाओ दो टूक शब्दो में कहा कि पहले जमीन का पट्टा प्रशासन दे उसके बाद खदान की बात होगी. ऐलिफेंट कारिडोर के प्रस्तावित लेमरु क्षेत्र को दरकिनार करते हुये राज्य सरकार नकिया कोल ब्लाक खोलना चाहती है.

प्राकृतिक रुप से चारों ओर पहाड़ों और घने जंगल से घिरा नकिया पंचायत पर कोयला खदान खोलने के लिये जहां एक ओर राज्य सरकार मेहरबान नजर आ रही है, वहीं कोल ब्लॉक के लिये कंपनियां भी उतावली हैं. असल में कोल ब्लॉक आवंटन की तारीख से निर्धारित अवधि में खनन कार्य शुरु करना होता है. नकिया-1,2 कोल ब्लाक से उत्पादन शुरु करने की अवधि खत्म हो चुकी है. लेकिन गरुवार को रपता गांव के बाद पेंडाडीह गांव में गाम सभा का आयोजन कोरबा एस डी एम की मौजूदगी हो गयी.

इस गांव में रहने वाले अधिकांश राष्ट्रपति के दत्तक पुत्र पहाडी कोरवा रहते हैं. इस गांव में कुल 76 मतदाता हैं. ग्राम सभा की बैठक में 44 लोगों की उपस्थित से बैठक का कोरम तो पुरा जरुर हो गया लेकिन रपता गांव के आकोशित गामीणो की तरह ये आदिवासी इस बात पर अड़ गये कि पहले उन्हें ज़मीन का पट्टा दिया जाये, उसके बाद कोल ब्लॉक की बात होगी.

जिला प्रशासन की तरफ से गाम सभा करा रहे कोरबा एस डी एम जी आर राठौर ने सरकारी लापरवाही को स्वीकार करते हुये कहा कि पेंडाडीह के गामीण पट्टा मिलने के बाद खदान खोलने की अनुमति दी है, हालांकि गामीण साफ कह रहे हैं कि उन्होंने अपनी सहमति नही दी है. ग्राम सभा की वीडियोग्राफी को लेकर भी एसडीएम गोलमोल जवाब देते रहे.

गाम पेंडाडीह की 33 हेक्टर जमीन के लिये आयोजित गाम सभा में पहुचे छत्तीसगढ़ केप्टीव कोल माइंनिग लिमिटेड कंपनी के सी ई ओ के के श्रीवास्तव ने बताया कि अंडर गाउड माइंस होने के कारण गामीणों को कोई नुकसान नही होगा.

दूसरी और कोरबा के सांसद और केंदीय कृषि राज्य मंत्री डा. चरणदास महंत ने साफ कहा है कि नकिया कोल ब्लाक का हमेशा से विरोध किया है और इसे किसी भी हालत में शुरु नहीं होने देंगे.

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