मोदी के बुर्के पर बोली कांग्रेस

नई दिल्ली | संवाददाता: गुजरात के मुख्यमंत्री नेता नरेंद्र मोदी के बुर्के पर कांग्रेस भड़की हुई है. संसदीय कार्य राज्य मंत्री राजीव शुक्ला ने मोदी के बयान को संविधान के खिलाफ बताया तो दिग्विजय सिंह ने मोदी को ‘असली फेंकू’ बताते हुये कहा कि मोदी 10 साल से एक राज्य के मुख्यमंत्री हैं और इस तरह के बयान दे रहे हैं. दिग्विजय ने कहा कि मोदी स्किल डिवेलपमेंट की बस बातें कर रहे हैं, जबकि केंद्र सरकार ने 50 हजार स्किल डिवलेपमेंट सेंटर शुरू कर दिए हैं.

गौरतलब है कि मोदी ने पुणे में भाजपा के एक सम्मेलन में कहा था कि केंद्र सरकार पर जब भी कोई संकट आता है वह सेक्युलरिज्म का बुर्का पहन लेते हैं और बंकर में छिप जाते हैं. कांग्रेस की पिछले 50 साल से बुर्का पहनकर बंकर में छिपने की चाल अब नहीं चलेगी. उसे बढ़ती बेरोजगारी, गरीबी, महंगाई का जवाब देना होगा.


मोदी ने कहा था कि रुपया आज डॉलर के मुकाबले 60 पर है. यह तब है जब देश के प्रधानमंत्री अर्थशास्त्र के विद्धान हैं. यह कौन सा अर्थशास्त्र है? यह कांग्रेस एक ऐसी धारा है जिसमें अच्छे से अच्छा शास्त्री भी ‘अनर्थशास्त्री’ बन जाता है. कांग्रेस में कोई भी गया, तबाही के रास्ते पर चल पड़ता है.

नरेंद्र मोदी ने केंद्र सरकार पर हमला बोलते हुये कहा था कि सुप्रीम कोर्ट ने जब कहा कि अन्न सड़ रहा है तो उसे गरीबों तक क्यों नहीं बांटा गया? केंद्र सरकार ने तब अन्न बांटने से इनकार कर दिया था. शराब बनाने वालों को 65 पैसे में यह अन्न बेच दिया गया. केंद्र सरकार ने शराब कंपनियों को बेचने के लिए अन्न को जानबूझकर सड़ने दिया.

अब मोदी के बयान पर कांग्रेस ने नाराजगी जाहिर की है. कांग्रेस नेता दिग्विजय सिंह ने नरेंद्र मोदी को असली फेंकू बताते हुये कहा कि मोदी कॉमनवेल्थ गेम्स पर सवाल उठा रहे हैं, जबकि आप इसमें भाग ले चुके किसी भी देश से पूछ लीजिए वह तारीफ ही करेंगे. उन्होंने कहा कि मोदी 10 साल से एक राज्य के मुख्यमंत्री हैं और इस तरह के बयान दे रहे हैं. दिग्विजय ने कहा कि मोदी स्किल डिवेलपमेंट की बस बातें कर रहे हैं, जबकि केंद्र सरकार ने 50 हजार स्किल डिवलेपमेंट सेंटर शुरू कर दिए हैं.

राजीव शुक्ला ने मोदी के इस बयान पर कहा कि अगर मोदी को सेक्युलरिज्म शब्द पर आपत्ति है तो फिर उन्हें संविधान पर भी आपत्ति होगी. संविधान में सेक्युलरिज्म शब्द दिया गया है. सभी ने इसे स्वीकार किया है. अगर वह संविधान में दिए गए शब्दों का मजाक बनाते हैं तो इसका मतलब है कि उन्हें संविधान में यकीन नहीं है. भारतीय राष्ट्र में तो वैसे भी उनकी आस्था नहीं है.

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