नसबंदी कराना गारंटी नहीं

बिलासपुर | जेके कर: बिलासपुर में पिछले साल नसबंदी करवाने वाली एक महिला गर्भवती हो गई है. खबरों के अनुसार बिल्हा ब्लॉक के ग्राम सेमरताल निवासी सरस्वती यादव पति चमरू यादव नसबंदी कराने के बावजूद गर्भवती हो गई है. इसके बाद इसका विरोध शुरु हो गया है. शासन से क्षतिपूर्ति का दावा किया जा रहा है. शासन नियमानुसार छतिपूर्ति भी दे सकती है परन्तु इससे नसबंदी को असफल करार नहीं दिया जा सकता है. चिकित्साशास्त्र तथा मरीजों पर किये गये परीक्षणों के अनुसार कोई भी परिवार नियोजन का तरीका सौ फीसदी गारंटी नहीं दे सकता कि इसके बाद भी गर्भधारण नहीं होगा.

इस गर्भवती होनी वाली महिला का ऑपरेशन बिलासपुर के चर्चित नसबंदी कांड में ही हुआ था. जिसमें 13 महिलाओं की मौत हो गई थी.


महिलाओं की नसबंदी विधि भी सौ फीसदी सफल नहीं हो सकती है. चिकित्सीय रूप से विकसित देशों में भी माना जाता है कि महिला नसबंदी के बाद 1 साल के अंदर 1 फीसदी महिला गर्भवती होती रहती है.

दरअसल, लेप्रोस्कोपी सर्जरी के द्वारा नसबंदी करके पुरुषों के वीर्य को महिला के अंडाशय तक पहुंचने से रोका जाता है. इसके लिये या तो उसे काट दिया जाता है या फिर उसमें रिंग या क्लिप लगा दिया जाता है. इसके बाद भी कई बार काटे गये फौलोपियन ट्यूब जुड़ जाते हैं या रिंग लगाना बाद में असफल हो सकता है.

इसी तरह से कॉपर टी लगवाने के बाद भी 1 फीसदी के गर्भवती होने की संभावना बनी रहती है. हॉर्मोनल इंजेक्शन से परिवार नियोजन करवाने के बाद भी 6 फीसदी महिलायें गर्भवती हो जाती हैं.

गर्भनिरोधक गोलिया तथा हॉर्मोनल पैच के बाद भी 9 फीसदी महिलायें गर्भवती हो सकती है. सरविकल कैप लगाने के बाद गर्भधारण की संभावना 14 फीसदी रहती है.

इसी तरह से पुरुषो के द्वारा कंडोम का उपयोग करने के बावजूद भी 18 फीसदी महिलायें गर्भवती हो जाती हैं. यहां तक की महिलायों के द्वारा कंडोम का उपयोग करने से यह संख्या बढ़कर 21 फीसदी हो सकती है.

स्पर्म को मार देने वाले गोलियों के उपयोग के बाद भी 28 फीसदी महिलायें गर्भवती हो जाती हैं.

किसी भी तरह के परिवार नियोजन का उपयोग न करने पर 85 फीसदी महिलाओं के गर्भधारण की संभावना होती है. कहने का तात्पर्य यह है कि चिकित्सा विज्ञान में सौ फीसदी गर्भनिरोध का कोई भी कारगार तरीका अब तक ईजाद नहीं हुआ है.

केवल महिलाओं के गर्भाशय को ऑपरेशन से निकाल देने के बाद ही गर्भधारण की संभावना नहीं रहती है.

हमारे पुरुषवादी समाज में परिवार नियोजन की जिम्मेदारी महिलाओं पर डाल दी जाती है तथा इसके असफलता का दोष चिकित्सा विज्ञान पर मढ़ दिया जाता है. खासकर छत्तीसगढ़ में पुरुष तो नसबंदी करवाने से भागते रहते हैं.

तथ्य जो साबित करते हैं कि पुरुष नसबंदी करवाने से कन्नी काटते हैं.

छत्तीसगढ़ में साल 2013-14 में कुल नसबंदी- 1,28,656
पुरुष नसबंदी- 4,624
महिला नसबंदी- 1,24,032

बस्तर संभाग में कुल नसबंदी- 10,544
पुरुष नसबंदी- 2,030
महिला नसबंदी- 8,514

बिलासपुर संभाग में कुल नसबंदी- 34,151
पुरुष नसबंदी- 764
महिला नसबंदी- 33,387

दुर्ग संभाग में कुल नसबंदी- 36,232
पुरुष नसबंदी- 677
महिला नसबंदी- 35,555

रायपुर संभाग में कुल नसबंदी- 33,554
पुरुष नसबंदी- 1,125
महिला नसबंदी- 32,429

सरगुजा संभाग में कुल नसबंदी- 14,175
पुरुष नसबंदी- 28
महिला नसबंदी- 14,147

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