एनसीआर के मकानों को नहीं मिल रहे खरीददार

कमज़ोर मांग के चलते राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (एनसीआर) के निर्माणाधीन 5.2 लाख मकानों मे से लगभग 27 फीसदी को खरीददार नहीं मिल पा रहे हैं. प्रापर्टी कसंल्टिंग फर्म नाइट फ्रैंक की एक रिपोर्ट में यह बात सामने आई है. इस रिपोर्ट के अनुसार एनसीआर के प्रापर्टी बाज़ार में इस वक्त करीब 5,20,000 रिहाइशी इकाइयों का निर्माण विभिन्न चरणों में चालू है लेकिन इनमें से अनुमानित 1,40,000 इकाइयां अभी तक नहीं बिक सकी हैं.

नाइट फ्रैंक ने इस स्थिति के पीछे ऊँची ब्याज दरें, मौजूदा आर्थिक परिदृश्य और लगातार बढ़ती महंगाई को बताया है. रिपोर्ट के अनुसार वित्त वर्ष 2012-13 की दूसरी तिमाही में 33500 नई रिहायशी की पेशकश हुई जो कि इससे पिछले वित्त वर्ष से 31% कम है. इसी अवधि के दौरान इन इकाइयों की बिक्री में भी 12 प्रतिशत की कमी आई है. हालांकि मांग में कमी के बाद भी निर्माण लागत में बढोत्तरी के चलते इन इकाइयों की कीमतें बढ़ी हैं.

वह रिहायशी इकाइयां जिनके लिए अभी तक खरीददारों ने ज्यादा रुचि नहीं दिखाई हैं उनमें से 78 प्रतिशत नोएडा और ग्रेटर नोएडा में से हैं. रिपोर्ट के अनुसार एनसीआर में निर्माणीधीन इकाइयों के डेवलेपरों को नकदी के गंबीर संकट से जूझना पड़ रहा है जिसके चलते निर्माण कार्य की गति और नए प्रोजेक्टों की शुरुआत पर नकारात्मक असर पड़ा है.

नाइट फ्रैंक की इस रिपोर्ट के अनुसार एनसीआर प्रापर्टी मार्केट में लगातार घटती मांग और नई परियोजनाओं में हो रही देरी के चलते बाज़ार ने एक सतर्कतापूर्ण दृष्टिकोण अपना रखा है.

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