छत्तीसगढ़ में ’नीरजा’ टैक्स फ्री

रायपुर | संवाददाता: हिन्दी फिल्म ’नीरजा’ को छत्तीसगढ़ सरकार ने मनोरंजन टैक्स से छूट देने का निर्णय लिया है. प्रदेश के सिनेमा घरों में यह छूट अगले छह महीने के लिए दी गई है. विभाग द्वारा यह अधिसूचना छत्तीसगढ़ मनोरंजन शुक्ल तथा विज्ञापन-कर अधिनियम के तहत जारी की गई है. अधिसूचना तत्काल प्रभावशील हो गई है. एयरहोस्टेस नीरजा भनोट के शहादत पर बनी फिल्म ‘नीरजा’ को निर्माता राम माधवानी ने अपील की थी कि इस फिल्म को राज्य सरकारों द्वारा मनोरंजन टैक्स में छूट दी जाये.

माधवानी ने कहा था, “हम चाहते हैं कि फिल्म को कर मुक्त किया जाए ताकि ‘नीरजा’ जैसी कहानियां अत्यधिक लोगों तक पहुंच पाएं और ज्यादा से ज्यादा लोग उन्हें याद रख पाएं.”

फिल्म विमान परिचारिका नीरजा भनोट की जिंदगी पर आधारित है, जिन्होंने अपहरण किए गए विमान पैन एम उड़ान संख्या 73 के यात्रियों की जान बचाने के लिए अपनी जिंदगी कुर्बान कर दी थी. फिल्म अभिनेत्री सोनम ने नीरजा का किरदार निभाया है.

हर आंख से निकला आंसू, कुछ ऐसी थी नीरजा
जिस दिन का करोड़ो हिंदुस्तानियों को इंतजार था वो 19 फरवरी 2016 के नाम से दर्ज हुआ. इस दिन ‘नीरजा’ रिलीज हुई और अब इस रिलीज के साथ ही नीरजा भनोट हर घर में पहुंच गई है. कम बजट की इस फिल्म को रिलीज के दिन ही देश में 4.7 करोड़ रुपये की ओपनिंग मिली थी.

महिलाओं और युवतियां जो एक दूसरे को जानती तक नहीं थी, वो भी आपस में नीरजा को लेकर चर्चा कर रहीं थी. किसी भी सिनेमा को लेकर ऐसा आजकल अमूमन कम ही होता है. वरना लोग सिनेमा देखते हैं पॉपकार्न खाते हैं और अपने रास्ते चले जाते हैं.

राम माधवानी की मेहनत तब सफल दिखती है, जब हॉल में बैठे हर एक दर्शक का हाथ उसकी आंखों की ओर जाता है और वो आंख दबा लेता है.

सोनम कपूर और शबाना आजमी अपने-अपने किरदारों के लिए सभी ओर से तारीफें ही बटोर रही हैं. माधवानी की ‘नीरजा’ ने हिंदुस्तान ही नहीं बल्कि खाड़ी देशों में भी पहले दिन परचम लहराया है. वहां फिल्म ने 1 लाख 35 हजार डॉलर के साथ ओपनिंग की है. महिला नायिका पर आधारित किसी भी फिल्म को खाड़ी देशों में यह अब तक का सबसे शानदार रिस्पांस है.

फिल्म ‘नीरजा’ एक वास्तविक घटना पर आधारित है. 23 साल की नीरजा भनोट ने 5 सितंबर 1986 को हाईजैक हुए पैमएम फ्लाइट 73 में सवार 359 लोगों की जान अपनी जान देकर बचाई थी. नीरजा ने कैसे लोगों की जान बचाई और अपनी जान देने में क्यों कोई गुरेज नहीं किया वो भी 23 साल की उम्र में. इसी पूरी घटनाक्रम पर यह फिल्म आधारित है.

उनकी बहादुरी के लिये मरणोपरांत उन्हें भारत सरकार ने शान्ति काल के अपने सर्वोच्च वीरता पुरस्कार अशोक चक्र से सम्मानित किया और साथ ही पाकिस्तान सरकार और अमरीकी सरकार ने भी उन्हें इस वीरता के लिये सम्मानित किया. नीरजा को भारत सरकार ने इस अदभुत वीरता और साहस के लिए मरणोपरांत अशोक चक्र से सम्मानित किया था जो भारत का सर्वोच्च शांतिकालीन वीरता पुरस्कार है.अपनी वीरगति के समय नीरजा भनोट की उम्र 23 साल थी.

इस प्रकार वे यह पदक प्राप्त करने वाली पहली महिला और सबसे कम आयु की नागरिक भी बन गईं. पाकिस्तान सरकार की ओर से उन्हें तमगा-ए-इन्सानियत से नवाज़ा गया.

मुम्बई से न्यूयॉर्क के लिये रवाना पैन ऍम-73 को कराची में चार आतंकवादियों ने अपहृत कर लिया और सारे यात्रियों को बंधक बना लिया था. नीरजा उस विमान में सीनियर पर्सर के रूप में नियुक्त थीं और उन्हीं की तत्काल सूचना पर चालक दल के तीन सदस्य विमान के कॉकपिट से तुरंत सुरक्षित निकलने में कामयाब हो गये.

पीछे रह गयी सबसे वरिष्ठ विमानकर्मी के रूप में यात्रियों की जिम्मेवारी नीरजा के ऊपर थी और जब 17 घंटों के बाद आतंकवादियों ने यात्रियों की हत्या शुरू कर दी और विमान में विस्फोटक लगाने शुरू किये तो नीरजा विमान का इमरजेंसी दरवाजा खोलने में कामयाब हुईं और यात्रियों को सुरक्षित निकलने का रास्ता मुहैय्या कराया.

वे चाहतीं तो दरवाजा खोलते ही खुद पहले कूदकर निकल सकती थीं किन्तु उन्होंने ऐसा न करके पहले यात्रियों को निकलने का प्रयास किया. इसी प्रयास में तीन बच्चों को निकालते हुए जब एक आतंकवादी ने बच्चों पर गोली चलानी चाही नीरजा के बीच में आकार मुकाबला करते वक्त उस आतंकवादी की गोलियों की बौछार से नीरजा की मृत्यु हुई. नीरजा के इस वीरतापूर्ण आत्मोत्सर्ग ने उन्हें अन्तर्राष्ट्रीय स्तर पर हीरोइन ऑफ हाईजैक के रूप में मशहूरियत दिलाई.

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