जीत बहादुर को नेपाल ले जायेंगे नमो

काठमांडू | समाचार डेस्क: प्रधानमंत्री मोदी 101 प्रतिनिधियों के साथ रविवार को अपनी दो दिवसीययात्रा पर नेपाल पहुंचेंगे. 17 वर्ष बाद कोई भारतीय प्रधानमंत्री नेपाल की यात्रा पर जा रहे हैं. दोनों देशों के बीच कई द्विपक्षीय वार्ताएं होंगी और कुछ समझौतों पर भी हस्ताक्षर किए जाएंगे.

जून में भूटान की यात्रा के बाद नेपाल मोदी का पड़ोस में दूसरा पड़ाव होगा.

इससे पहले नेपाल की यात्रा पर 1997 में तत्कालीन प्रधानमंत्री आईके गुजराल आए थे. इसके बाद भारतीय प्रधानमंत्री नेपाल आए लेकिन वह दूसरे मकसद से हुई यात्रा थी.

मोदी के साथ राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल के अलावा उद्योग जगत के लोग भी होंगे. वे ऐसे पहले विदेशी नेता होंगे जो नेपाल की संविधानसभा को संबोधित करेंगे.

त्रिभुवन अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डे पर मोदी का स्वागत स्वयं प्रधानमंत्री सुशील कोईराला करेंगे. मोदी रविवार को कोईराला से वार्ता करेंगे.

सोमवार को मोदी पशुपतिनाथ मंदिर में पूजा-अर्चना करेंगे और उसके बाद राष्ट्रपति रामबरन यादव से मुलाकात करेंगे. यादव मोदी के लिए भोज का आयोजन करेंगे.

नरेंद्र मोदी के साथ 16 वर्षो से रह रहा एक नेपाली युवक जीत बहादुर प्रधानमंत्री की नेपाल यात्रा पर भी उनके साथ नेपाल जाएगा और अपने परिवार वालों से मिलेगा. प्रधानमंत्री की रविवार से शुरू हो रही नेपाल यात्रा में जीत बहादुर सारू मागर भी उनके साथ होंगे.

मोदी ने यात्रा के दौरान जीत बहादुर के परिवार के सदस्यों से मिलने की इच्छा जाहिर की है. मोदी ने शनिवार को ट्वीट किया, “मेरी नेपाल यात्रा व्यक्तिगत तौर पर बेहद खास है. काफी साल पहले मैं एक नेपाली बच्चे जीत बहादुर से मिला था, जिसे यह नहीं पता था कि वह कहां जा रहा है.”

मोदी ने कहा, “मैंने जीत बहादुर पर ध्यान देना शुरू किया. धीरे-धीरे वह पढ़ने-लिखने और खेल-कूद में रुचि लेने लगा. यहां तक कि वह गुजराती भी सीख गया. हमने उनके परिवार को ढूंढ निकाला. मुझे खुशी है कि उनके माता-पिता कल अपने बेटे से मिलेंगे.”

गौरतलब है कि साल 1998 में जीत बहादुर अपने भाई के साथ काम की तलाश में भारत आए थे. कुछ दिनों तक उन्होंने राजस्थान में काम किया, लेकिन इससे वे संतुष्ट नहीं थे. उन्होंने नेपाल वापस लौटने का फैसला किया. लेकिन रेलवे स्टेशन पर वे गलती से गोरखपुर की जगह अहमदाबाद जाने वाली गाड़ी में चढ़ गए.

अहमदाबाद में एक महिला उन्हें मोदी के पास ले गई. उस वक्त मोदी गुजरात के मुख्यमंत्री नहीं बने थे. तब से वे मोदी के साथ ही हैं.

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