कभी देखा है ऐसा घोंसला

लंदन | एजेंसी: शायद ही आप कल्पना कर पाएं कि चिड़िया का घोंसला भी पेड़ों के लिए खतरा हो सकता है. लेकिन गौरैया प्रजाति की एक चिड़िया ऐसा घोंसला बनाती है जो किसी विशाल पेड़ को गिरा सकता है? निश्चित ही आप इस पर विश्वास नहीं कर पा रहे होंगे. वास्तव में अफ्रीका में पाई जाने वाली चिड़ियों की एक प्रजाति का सामाजिक ताना-बाना इतना सघन होता है और वे मिलकर इतने विशाल घोंसले का निर्माण करती हैं कि कई बार पेड़ उसके भार से गिर जाते हैं.

अफ्रीका के दक्षिणी हिस्से में पाई जाने वाली गौरेया प्रजाति यह चिड़िया झुंड में रहते हुए अपने लिए एक ही घोंसला बनाती है. ठीक वैसे ही जैसे इंसान कॉलोनी बसाते हैं. एक घोंसले में 500 चिड़ियों का समूह रह सकता है.

इन घोंसलों के आकार का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि इसका वजन 900 किलो से भी ज्यादा हो सकता है. कई बार इन घोंसलों की लंबाई 20 फुट और चौड़ाई 13 फुट तक होती है. इसकी मोटाई भी सात फुट तक होती है.

मियामी विश्वविद्यालय के जीव विज्ञानी गाविन लिटन के अनुसार, “घोंसले का ढांचा इतना बड़ा होता है कि यह उस पेड़ को भी गिरा सकता है जिसपर इसे बनाया गया है. साथ ही घोंसले का निर्माण इतने शानदार तरीके से यह चिड़ियाएं करती है कि अगले सौ साल तक वे इसका उपयोग कर सकें.”

सोशल वीवर यानी सामाजिक बुनकर नाम से जानी जाने वाली ये चिड़ियाएं घोंसले के अंदर घास, पंख और रूई इत्यादि का उपयोग कर अलग-अलग कमरों का निर्माण करती हैं. सर्दियों में एक कमरा तीन से चार पक्षियों को गर्म स्थान प्रदान करता है.

वेबसाइट ‘वायर्ड डॉट कॉम’ के अनुसार यह चिड़िया घोंसले में जाने का रास्ता नीचे की ओर रखती हैं, ताकि कोई बाहरी जीव इसमें आसानी से प्रवेश न कर सके.

इस तरह से बारिश का पानी भी घोंसले में नहीं ठहरता. इन चिड़ियाओं के घोंसले की एक और बात बेहद दिलचस्प है, वो यह है कि घोंसले के अंदर बने कमरे कभी भी आपस में जुड़े नहीं होते. हर कमरे में जाने का अलग रास्ता होता है.

लीटन के अनुसार इस तरह बड़े झुंड में इन चिड़ियाओं के रहने का एक मुख्य कारण सुरक्षा है. झुंड में रहने से किसी शिकारी का खतरा कम होता है.

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