नोटबंदी से संबंधित नये तथ्य

नई दिल्ली | विशेष संवाददाता: नोटबंदी को पूरे एक माह हो गये हैं. इस बीच तरह-तरह के दावे किये गये, आकड़े पेश किये गये. अब उन दावों तथा आकड़ों को फिर से परखने का समय आ गया है. सीजीखबर की टीम ने नोटबंदी से संबंधित कुछ आकड़े पहले पेश किये थे.

अब के नये आकड़े इस तरह से है-


* बेकार हुये 500 और 1000 के नोट:

रिजर्व बैंक के द्वारा अपनी वार्षिक रिपोर्ट में 31 मार्च 2016 तक का आकड़ा पेश किया गया था. उसके अनुसार 8 नवंबर की मध्य रात्रि से 14.17 लाख करोड़ रुपयों के नोट चलन से बाहर हो गये हैं. जबकि रिजर्व बैंक द्वारा जो ताजे आकड़ें पेश किये गये हैं उसके अनुसार 8 नवंबर की रात से 500 और 1000 के जो नोट बेकार हो गये हैं वह दरअसल 15.5 लाख करोड़ रुपये का है. यह कुल करेंसी का 86 फीसदी है.

* बैंकों में जमा किये गये पुराने नोट:

रिजर्व बैंक के ताजा आकड़ों के अनुसार अब तक 11.5 लाख करोड़ रुपये के पुराने नोट बैंकों में जमा कराये गये हैं.

* कुल पुराने नोट जमा होने का अनुमान:

जानकारों का मानना है कि 31 दिसंबर तक 14 लाख करोड़ रुपयों से उपर के पुराने नोट बैंकों में जमा करा दिये जा सकते हैं. अभी भी और 3 हफ्ते का समय है जिसके बीच बैंकों में पुराने नोट जमा कराये जा सकते हैं. इसी अनुमान के अनुसार महज 1.5 लाख करोड़ रुपयों का नोट बैंकों में जमा हो नहीं पायेगा.

* काले धन का अनुमान:

नोटबंदी की घोषणा के साथ अनुमान लगाया गया था कि करीब 3 लाख करोड़ रुपयों से ज्यादा की काली नगदी बैंकों में वापस नहीं आयेगी तथा सर्कुलेशन से बाहर हो जायेगी. इस तरह से रिजर्व बैंक की देनदारी कम हो जायेगी तथा यह रकम सरकार के लाभांश के रूप में बच जायेगी. नये आकड़ों तथा अनुमान के अनुसार इससे आधी ही रकम बैंकों में जमा नहीं हो पायेगी.

* निष्कर्ष:

अभी किसी नतीजे पर पहुंचना जल्दबाजी होगी. फिर भी यह माना जा रहा है कि मात्र 1.5 लाख करोड़ रुपये के आसपास की काली नगदी इस नोटबंदी की मुहिम से बेकार चली जायेगी.

उधर, सेन्टर फॉर मॉनिटरिंग द इंडियन इकॉनोमी (सीएमआईई) के मुताबिक 30 दिसंबर 2016 तक नोटबंदी अभियान के तहत होनेवाला कुल खर्च 1.28 लाख करोड़ रुपया है.

रिज़र्व बैंक ने मान लिया है कि विकास दर 7.6% से घटकर 7.1% ही रह सकती है.

बैंकों में पुराने नोटों के जमा होने की तेजी देखकर नोटबंदी से काली नगदी के बेकार चले जाने के दावें ठंडे पड़ते नज़र आ रहें हैं. इस बीच आयकर विभाग ने एक बड़ा डेटा एनालिटिक्स साफ़्टवेयर तैयार किया है, जो बैंकों में जमा की गयी हर संदिग्ध रक़म को पकड़ेगा.

जानते हैं उसके बाद क्या होगा? नोटिस दी जायेगी, एक्सपर्ट उसका जवाब देंगे, केस चलेगा, तारीख पर तारीख दी जायेगी, और क्या? कुछ नतीजे खुद भी निकालिये, जनाब.

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