नेत्र कांड पर मानवाधिकार आयोग सख्त

नई दिल्ली | समाचार डेस्क: छत्तीसगढ़ सरकार नेत्र कांड के दोषियों पर अपराधिक मामले दर्ज करे. बुधवार को राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग ने इसकी अनुशंसा की है. आयोग ने कहा है कि छत्तीसगढ़ के धमतरी तथा बागबहरा नेत्र कांड के पीड़ितो को दी गई सहायता राशि पर्याप्त नहीं है इस कारण से राज्य सरकार उन्हें और 50-50 हजार रुपयों का मुआवजा दे.

गौरतलब है कि छत्तीसगढ़ में राज्य सरकार द्वारा आयोजित आंखों के मोतियाबिंद के आपरेशन के कैंप के दौरान 16 लोगों की आंखे खराब हो गई थी. जिसका मीडिया रिपोर्ट के आधार पर राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग ने स्वंय संज्ञान लिया था.

आयोग ने छत्तीसगढ़ सरकार से कहा है कि आंखे खोने वाले 16 पीड़ितो को और 50-50 हजार रुपयों का मुआवजा दिया जाये. इसी के साथ आयोग ने कहा है कि दोषियों के खिलाफ अपराधिक मामले शुरु किये जायें.

आयोग ने छत्तीसगढ़ के मुख्य सचिव को कहा है कि 8 सप्ताह के भीतर पीड़ितो को मुआवजा देकर उसका सबूत आयोग के सामने पेश करें तथा यह भी सूचित करें कि 3 दोषी चिकित्सकों पर क्या कार्यवाही हुई है तथा उसकी स्थिति के बारे में जानकारी दे.

छत्तीसगढ़ सरकार द्वारा भेजे गये रिपोर्ट में आयोग ने यह पाया था कि नेत्र सर्जरी के दौरान उपयोग में लाये गये दवा अवमानक स्तर के थे. इसलिये इसके दोषियों पर भी अपराधिक कार्यवाही करने के लिये आयोग ने छत्तीसगढ़ सरकार को कहा है. ज्ञात रहे कि राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग ने 31 दिसंबर 2012 को मीडिया में छपी रिपोर्ट के आधार पर इस नेत्र कांड का स्वंय संज्ञान लिया था.

गौरतलब है कि आयोग के नोटिस के जवाब में छत्तीसगढ़ सरकार के स्वास्थ्य विभाग ने उन्हें सूचित किया था कि 16 पीड़ितो को 50-50 हजार रुपयों की सहायता राशि मुख्यमंत्री सहायता कोष से दी गई है. अपने जवाब में स्वास्थ्य विभाग ने सूचित किया था कि 1 नेत्र रोग विशेषज्ञ, 2 सहायक नेत्र अधिकारी तथा 2 स्टाफ नर्सो को निलंबित कर दिया गया था तथा उनके खिलाफ विभागीय कार्यवाही शुरु कर दिया गया है.

स्वास्थ्य विभाग ने आयोग को अपने जवाब में आगे बताया था कि नेत्र सर्जरी में उपयोग में लाये गये 5 दवाओं को अवमानक स्तर का पाने के कारण उनके उत्पादक और सप्लायर्स को सरकार ने प्रतिबंधित कर दिया है. बहरहाल, आयोग की अनुशंसा के बाद दोषियों पर अपराधिक मामले दर्ज किया जा सकता है.

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