छत्तीसगढ़: नन रेप जांच में खामिया

नई दिल्ली | संवाददाता: छत्तीसगढ़ के रायपुर नन रेप केस की जांच में मानवाधिकार आयोग ने कई खामिया गिनाई हैं. गुरुवार को जारी प्रेस विज्ञपत्ति में राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग ने कहा है कि पीड़िता को राहत देने तथा उसके पुनर्वास के लिये राज्य सरकार ने कोई उपाय नहीं किये. राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग ने रायपुर के आईजीपी द्वारा प्रेस को दिये गये बयान को जल्दबाजी से भरा तथा गैर जिम्मेदाराना बताया है. आयोग ने कहा है कि इसकी जरूरत नहीं थी तथा आईजीपी के बयान से पीड़िता के प्रति संवेदनशीलता की कमी तथा उसके अधिकार की जानकारी न होना उजागर होता है.

उल्लेखनीय है कि 20 जून 2015 को रायपुर में एक नन के साथ रेप किया गया था जिसके आरोपी अब तक पकड़ से बाहर हैं.

राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग ने इस सिलसिले में रायपुर के पुलिस अधीक्षक, छत्तीसगढ़ के डीजीपी तथा मुख्य सचिव से छः हफ्तों में बिन्दुवार कार्यवाही की रिपोर्ट देने को कहा है.

आयोग ने कहा है कि पीड़िता का बयान न्यायिक मजिस्ट्रेट के समक्ष रिकॉर्ड नहीं कराया गया है और न ही खून, मूत्र तथा शरीर के अन्य तरल पदार्थो का सेम्पल लिया.

मानवाधिकार आयोग ने छत्तीसगढ़ सरकार तथा मुख्य सचिव से अनुशंसा की है कि जिला प्रशासन को सर्वोच्य न्यायालय के निर्देश के अनुसार पीड़िता के पुनर्वास योजना के बारे में जागरुक करे तथा रेप पीड़िता के चिकित्सीय जांच के लिये एसडीएम या मजिस्ट्रेट से अनुमति लेना कानूनी रूप से अनिवार्य नहीं है.

राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग ने छत्तीसगढ़ के डीजीपी को निर्देश दिया है कि मीडिया के संबंध में एक पॉलिसी बनाई जाये तथा पुलिस अधिकारियों को प्रेस में बयान देते समय संवेदनशीलता बरतने को कहे.

आयोग ने रायपुर के पुलिस अधीक्षक को निर्देश दिया है कि पीड़िता का बयान न्यायिक मजिस्ट्रेट के समक्ष लिया जाये. एफआईआर की धारा में उचित संशोधन किया जाये.

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