केंद्र ने भी झीरम कांड से झाड़ा पल्ला

रायपुर | संवाददाता:केंद्र सरकार ने छत्तीसगढ़ सरकार को झीरम कांड में NIA के साथ मिल कर जांच करने का प्रस्ताव दिया है.केंद्र सरकार ने कहा है कि अभी जबकि ट्रायल चल रहा है, ऐसे में मामले को राज्य सरकार को सौंपना उचित नहीं होगा.

गौरतलब है कि 25 मई 2013 को बस्तर के दरभा-झीरम इलाके से गुज़र रही कांग्रेस की परिवर्तन यात्रा पर संदिग्ध माओवादियों ने हमला किया था, जिसमें कांग्रेस पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष नंद कुमार पटेल, पूर्व केंद्रीय मंत्री विद्याचरण शुक्ल, बस्तर के आदिवासी नेता महेंद्र कर्मा समेत 28 लोग मारे गये थे.


इस मामले की एनआईए ने जांच की थी और मामला अभी अदालत में लंबित है. राज्य की भाजपा सरकार ने इस मामले पर सीबीआई की जांच कराने की घोषणा की थी. लेकिन विधानसभा में इस घोषणा के बाद भी मामले की जांच सीबीआई से नहीं करवाई गई.

इसके बाद 2018 के चुनाव में सत्ता में आई कांग्रेस पार्टी ने झीरम घाटी मामले की जांच के लिये एसआईटी गठित कर के एनआईए से पूरी फाइल मांगी थी. लेकिन 11 फरवरी को लिखे एक पत्र में भारत सरकार के अंडर सेक्रेट्री धर्मेंद्र कुमार ने फाइल देने से इंकार कर दिया है.

भारत सरकार ने अपने पत्र में राज्य सरकार के 29 दिसंबर 2018 को लिखे गये पत्र का हवाला देते हुये कहा है कि केस नंबर-RC-06/2013/NIA/DLI दिनांक 25.07.2012 के मामले में NIA ने अपनी जांच पूरी करने के बाद 9 लोगों के ख़िलाफ़ 25.09.2014 को आरोप पत्र दाखिल किया था. इसके अलावा 30 लोगों के ख़िलाफ़ 28.09.2015 को पूरक चालान पेश किया था.

भारत सरकार ने लिखा है कि इस मामले में एनआईए की विशेष अदालत में ट्रायल के दौरान 91 गवाहों की गवाही भी पूरी हो चुकी है. ऐसी स्थिति में चल रहे ट्रायल के बीच में मामले को राज्य शासन को सौंपना उचित नहीं पाया गया है.

पत्र में राज्य सरकार को यह प्रस्ताव दिया गया है कि अगर कुछ नये तथ्य सामने आते हैं तो राज्य सरकार NIA एक्ट 2008 की धारा 7 (ए) के तहत अपने को NIA के साथ संबद्ध कर सकती है.

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