बिहार में लोकतंत्र की हत्या का प्रयास: नीतीश

पटना | एजेंसी: बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने बजट सत्र के पहले दिन मांझी को बहुमत साबित करने के लिये कहने पर सवाल उठायें हैं. नीतीश कुमार ने कहा कि मांझी को बहुमत साबित करने के लिये विधानसभा का विशेष सत्र बुनाया जाना चाहिये था. उन्होंने आरोप लगाया कि समय मिलने से बिहार में विधायकों की खरीद-फरोख्त होगी जिसके पीछे उन्होंने प्रधानमंत्री मोदी का हाथ होने का आरोप लगाया. नीतीश कुमार ने गुरुवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और भाजपा पर राज्य में संसदीय लोकतंत्र की हत्या की कोशिश करने का आरोप लगाया. नीतीश ने कहा कि मुख्यमंत्री जीतनराम मांझी को बहुमत साबित करने के लिए अधिक समय देकर राज्यपाल केशरीनाथ त्रिपाठी उन्हें खरीद फरोख्त का मौका दे रहे हैं और इसके पीछे मोदी और भाजपा का हाथ है.

उन्होंने कहा, “राज्यपाल और भाजपा बिहार में संसदीय लोकतंत्र की हत्या का प्रयास कर रहे हैं और इस खेल के पीछे मोदी खड़े हैं.”


पूर्व मुख्यमंत्री दिल्ली से लौट आए हैं जहां उन्होंने अपने 130 समर्थक विधायकों के साथ राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी से मुलाकात की. राष्ट्रपति भवन में सदेह उपस्थित हुए विधायकों में जनता दल युनाइटेड, राष्ट्रीय जनता दल , कांग्रेस, भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी के और निर्दलीय विधायक शामिल थे.

नीतीश कुमार ने राज्यपाल केशरीनाथ त्रिपाठी द्वारा बजट सत्र के पहले दिन 20 फरवरी को बहुमत साबित करने का समय देने के फैसले पर सवाल उठाया है.

नीतीश कुमार ने कहा, “इस खेल में मोदी पर्दे के पीछे हैं. दिल्ली में मोदी से मुलाकात के तुरंत बाद ही मांझी ने खुलेआम खरीद-फरोख्त की अपनी योजना का खुलासा किया और जदयू को तोड़ने का अभियान शुरू कर दिया.”

उन्होंने कहा कि राज्य पर राष्ट्रपति शासन थोपने के लिए बिहार का राजनीतिक वातावरण दूषित कर रहे हैं.

उन्होंने कहा, “लेकिन जदयू, राजद, कांग्रेस और भाकपा बिहार में राष्ट्रपति शासन लागू करने की इजाजत नहीं देगा.”

नीतीश कुमार ने कहा कि उन्होंने राज्यपाल को विधानसभा का विशेष सत्र बुलाने और मुख्यमंत्री को अपना बहुमत साबित करने का अवसर मुहैया कराने अवसर देने की मांग की थी.

उन्होंने आरोप लगाया कि लेकिन राज्यपाल ने हमारे आग्रह को ठुकरा दिया और मांझी को खरीद-फरोख्त का पर्याप्त समय दिया.

बिहार विधानसभा में पांच राजनीतिक दल हैं जिनमें से चार जदयू के साथ हैं.

भाजपा ने अभी तक अपने समर्थन का खुलासा नहीं किया है.

राज्यपाल के सचिव ब्रजेश मिश्र के मुताबिक, विधानसभा में संयुक्त अधिवेश को राज्यपाल द्वारा संबोधित किए जाने के तुरंत बाद ही बहुमत परीक्षण या तो गुट विभाजन या गुप्त मतदान के जरिए होगा.

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