नीतीश को मिला विश्वासमत

पटना | संवाददाता: बिहार में नीतीश कुमार की सरकार ने विश्वासमत प्राप्त कर लिया है. नीतीश कुमार की ओर से पेश विश्वास प्रस्ताव पर सरकार के पक्ष में 126 वोट पड़े, जबकि विपक्ष में कुल जमा 24 विधायकों ने वोट डाले. जिस गठबंधन के साथ नीतीश कुमार की सरकार चल रही थी, उसमें शामिल भाजपा ने मतदान का बहिष्कार कर दिया. मतदान के बाद विधानसभा की कार्यवाही अनिश्चितकाल के लिए स्थगित कर दी गयी.

सदन में सरकार के खिलाफ बोलते हुये भाजपा नेता नंद किशोर यादव ने कहा कि जनता दल यूनाइटेड द्वारा गठबंधन तोड़ना जनादेश का अपमान है. मुख्यमंत्री ने जनता के साथ विश्वासघात किया है. विधायक निधि की व्यवस्था को समाप्त किए जाने के लिए सीधे तौर पर मुख्यमंत्री को कसूरवार ठहराते हुए उन्होंने पूछा कि क्या आपकी नजर में विधायक ईमानदार नहीं?


यादव ने कहा कि नीतीश कुमार जिस रास्ते चलना चाहें, चलें. जनता कांग्रेस के विरोध में है, तो आपके साथ खड़े होने से कुछ नहीं होता. आपने जनादेश के साथ विश्वासघात किया है. आपकी बहुत पहले से अकेले सरकार चलाने की मंशा थी. आपने कांग्रेस के साथ का जुगाड़ कर लिया. कुछ विधायकों को खरीद लेंगे. ऐसे में इस विश्वास मत का कोई मतलब नहीं. हमारी पार्टी विधानसभा से बाहर जा रही है. इसके बाद भाजपा विधायकों ने सदन से बहिष्कार कर दिया.

बुधवार को सदन की कार्रवाई शुरु होने के बाद नीतीश कुमार ने विश्वास मत पर जवाब देते हुये भाजपा पर खूब निशाना साधा. नीतीश कुमार ने कहा कि अब कुछ कहने के लिए बाकी नहीं रह गया है. भाजपा ने सब कुछ स्पष्ट कर दिया है. वे अपने जिस हकीकत को आज तक सार्वजनिक नहीं कर पाए, उसका आज प्रदर्शन कर दिया.

नीतीश कुमार ने कहा कि हमारा गठबंधन इसलिए टूटा क्योंकि इसके बीच बाहरी तत्व का प्रवेश कराए जाने की कोशिश होने लगी थी. भाजपा के भीतर व्यक्ति विशेष को इतना महत्व मिलने लगा कि हमारा साथ चलना संभव नहीं रह गया था. हम पर अपने सिद्धांत थोपे जाने की कोशिश हो रही थी. भाजपा के नेताओं ने सदन में अपने भाषणों में यह सब कुछ स्पष्ट कर दिया है. वे कह रहे कि देश हिंदुत्व के रास्ते पर चलेगा. आखिर कैसे. हमारा देश और समाज विविधताओं से परिपूर्ण है. लिहाजा यहां समावेशी नीति ही औचित्यपूर्ण होगी. यह हमारा सिद्धांत है. यही हमारी नीति है. हम उसी रास्ते पर चल रहे हैं.

मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने कहा कि व्यक्ति विशेष संगठन पर हावी हो रहा था. हमने प्रधानमंत्री पद के बाबत भाजपा से स्पष्ट जानना चाहा था, लेकिन हर बार हीलाहवाली होती रही. आज बताएंगे, कल बताएंगे, कहा जाता रहा. भाजपा में अटल बिहारी वाजपेयी और लालकृष्ण आडवाणी का कभी दौर था. हम उनके समय में राजग में शामिल हुए थे. राजग में शामिल होते समय जदयू ने धारा-370, समान नागरिक संहिता और राम जन्मभूमि-बाबरी मस्जिद के बाबत अपना नजरिया स्पष्ट कर दिया था. तीन मुद्दों को अपने एजेंडे से बाहर रखने के भाजपा के वचन पर जदयू ने गठबंधन में शामिल होने का फैसला लिया था.

नीतीश कुमार ने आरोप लगाया कि इधर के दिनों में भाजपा अपने उन फैसलों से लगभग पीछे हटने लगी थी. भाजपा में व्यक्ति विशेष के लिए हम पर निर्णय थोपे जाने की कोशिश को हमने दरकिनार कर दिया. हमें मजबूरी में अलग होना पड़ा.

गुजरात पर निशाना साधते हुये नीतीश कुमार ने कहा कि गुजरात में न्यूनतम मजदूरी क्या है? जहां तक मुझे जानकारी है, वह सौ रुपये है. क्या यही विकास है? क्या यही मॉडल है? बिहार में यह नहीं चलेगा. बिहार में बिहार मॉडल चलेगा. यहां समावेशी विकास की नीति चलेगी, किसी और राज्य की नीति नहीं चलेगी.

नीतीश कुमार ने भाजपा नेताओं पर आरोप लगाते हुये कहा कि कारपोरेट जगत की ओर से उड़ाई गई हवा में देश नहीं बहेगा. यह देश विविधताओं से भरा है. यहां सबको साथ लेकर चलने की नीति चलेगी. यहां समावेशी हवा ही बहेगी. अगर इसे रोका गया तो यह देश बिखर जाएगा. जो लोग इस भ्रम में हैं कि हवा उनके पक्ष में है, वह भ्रम भी टूट जाएगा. केंद्र में सरकार बनाने के लिए 272 सांसदों की जरूरत होगी.

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