नीतीश कुमार संघ मुक्त भारत बनाने वाले थे !

पटना | संवाददाता: नीतीश कुमार ने इसी साल अप्रैल में ‘संघ मुक्त’ भारत बनाने की बात कही थी.एक सभा को संबोधित करते हुये कहा था कि अटल बिहारी वाजपेयी, लालकृष्ण आडवाणी और मुरली मनोहर जोशी को पार्टी के भीतर दरकिनार कर दिया गया है और अब यह दल और सत्ता ऐसे व्यक्ति के हाथ में चली गई है, जिनका धर्मनिरपेक्षता और सांप्रदायिक सौहार्द में कोई विश्वास नहीं है. नीतीश ने प्रतिज्ञा की थी कि मिट्टी में मिल जायेंगे लेकिन भाजपा से फिर कभी हाथ नहीं मिलायेंगे.

लेकिन अब कहानी बदली हुई है. नीतीश कुमार ने जिस भारतीय जनता पार्टी के खिलाफ जनमत लिया था, अब उसी भारतीय जनता पार्टी की गोद में फिर से बैठ गये हैं. उनका यह क़दम अप्रत्याशित नहीं था. यही कारण है कि उन पर मीडिया में उसी अंदाज में टिप्पणी आ रही है.


राहुल गांधी ने टिप्पणी करते हुये कहा कि पिछले चार महीने से नीतीश कुमार इसकी तैयारी कर रहे थे. किसी की भी गतिविधियां देख कर समझ में आ जाता है कि उसके मन में क्या चल रहा है. उन्होंने कहा कि हिन्दुस्तान की राजनीति की यही समस्या है कि राजनेता स्वार्थ के लिए कुछ भी कर जाते हैं… जो जनादेश मिला था, वह सांप्रदायिकता के खिलाफ था.

उत्तरप्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने सीधे नीतीश कुमार पर ताना कसते हुए ट्विटर पर लिखा- ना ना करते, प्यार तुम्हीं से कर बैठे, करना था इंकार मगर इक़रार तुम्हीं से कर बैठे.

कांग्रेस के महासचिव दिग्विजय सिंह ने बिहार के घटनाक्रम को लेकर ट्वीट किया- एक बार फिर से बिहार में राज्यपाल ने सरकारिया कमीशन और सर्वोच्च न्यायालय के आदेशों का उल्लंघन किया है. सबसे बड़ी पार्टी राजद को मौका नहीं दिया गया है. भाजपा का प्रजातंत्र में विश्वास ना पहले था ना अब है. इस कृत्य के लिए धिक्कार है.

लेकिन नीतीश कुमार इन सब से बेफिक्र नज़र आये. उन्होंने कहा-मेरी जवाबदेही बिहार के प्रति है और मैं वक्त आने पर सभी को जवाब दूंगा. मैंने बिहार के हित में फैसला लिया है.

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

error: Content is protected !!