छत्तीसगढ़ में अल-नीनो बेअसर

रायपुर | संवाददाता: छत्तीसगढ़ में अल-नीनो बेअसर रहेगा. छत्तीसगढ़ में अब तक कम बारिश होने से इस बात के कयास लगाये जा रहे हैं कि यह अन-नीनो का प्रभाव है. वास्तव में अन-नीनो से तात्पर्य यह है कि समुद्र के गर्म हो जाने से उत्तर की ओर बहने वाली हवा कमजोर हो जाती है, जिससे मानसून भी कमजोर हो जाता है. लेकिन विशेषज्ञों की मानें तो छत्तीसगढ़ में पहले भी अल-नीनो का असर नहीं रहा है और इस साल भी इसका छत्तीसगढ़ के मानसून पर कोई फर्क नहीं पड़ेगा.

बिलासपुर में कृषि मामलों के जानकार नंद कश्यप का कहना है कि अल-नीनो का प्रभाव पश्चिमी उत्तरप्रदेश, पंजाब, हरियाणा, उत्तरी मध्यप्रदेश, राजस्थान, गुजरात, पश्तिमी महाराष्ट्र तथा कर्नाटक के कुछ हिस्सों पर पड़ेगा. नंद कश्यप ने बताया कि अन-नीनो का प्रभाव जुलाई में पड़ता है, जून माह में नहीं. इसलिये फिलहाल छत्तीसगढ़ में हो रही कम बारिश का संबंध अन-नीनो से नहीं है.

नंद कश्यप का कहना है कि वर्तमान में छत्तीसगढ़ में जो कम बारिश हो रही है, वह मौसम के बिगड़ने के कारण है. जिसका संबंध ग्लोबल वार्मिंग से ज्यादा है. गौरतलब है कि छत्तीसगढ़ में 22 जून तक ही लगभग 100 मिमी पानी बरस जाता है, लेकिन इस बार केवल 63 मिमी पानी ही बरसा है. यह महीना पहले ही कई दिन तक तापमान 40 डिग्री से ज्यादा का रिकार्ड बना चुका है.

कृषि मामलों के एक और जानकार प्रदीप शर्मा का कहना है कि मानसून आगे-पीछे होता रहता है जिसे अल-नीनो से नहीं जोड़ा जा सकता है. उनका कहना है कि 1 जुलाई के बाद मानसून ठीक से आता है. उन्होंने भी अब तक छत्तीसगढ़ में हुए कम बारिश के लिये अल-नीनो को नहीं बल्कि ग्लोबल वार्मिग को जिम्मेदार ठहराया है.

अल-नीनो के बारे में छत्तीसगढ़ के कृषि मामलों के जानकार प्रदीप शर्मा ने आगे बताया कि इससे मानसून की दिशा बदल जाती है तथा बारिश भारी के बजाये, हल्की होती है. गौरतलब है कि मौसम विभाग ने इस साल मानसून में 95 फीसदी बारिश का अनुमान जारी किया है. इसके मुताबिक छत्तीसगढ़ में लगभग 1100 मिलीमीटर के आसपास बारिश का अनुमान है. मौसम विभाग के इस अनुमान से दोनों कृषि मामलों के जानकारों की बात की पुष्टि हो जाती है. यदि अन-नीनो का प्रभाव होता तो बारिश कुल मिलाकर कम होनी चाहिये.

छत्तीसगढ़ के मौसम विभाग की ही जानकारी के अनुसार वर्ष 2013 में 1165.1 मिलीलीटर, 2012 में 1227.5 मिलीलीटर, 2011 में 1220.4 मिलीलीटर, 2010 में 1034.6, 2009 में 796.2 मिलीलीटर, 2008 में 1064.4 मिलीलीटर, 2007 में 1105 मिलीलीटर, 2006 में 1077 मिलीलीटर तथा 2005 में 1081 मिलीलीटर वर्षा छत्तीसगढ़ में हुई थी. जबकि इस वर्ष मौसम विभाग का अनुमान है कि लगभग 1100 मिलीलीटर वर्षा हो सकती है.

इसी से स्पष्ट है कि वर्षा करीब-करीब औसतन ही रहने वाली है जिसे किसी भी तरह से अल-नीनो का प्रभाव नहीं कहा जा सकता है. हां, बारिश के देर से आने को ग्लोबल वार्मिंग का असर अवश्य कहा जा सकता है, जो वास्तविकता है. यदि अल-नीनो का प्रभाव होता तो बारिश कम होनी चाहिये.

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