मिड-डे-मील से आलू गायब

रायपुर | एजेसी: छत्तीसगढ़ के स्कूलों में मिड डे मील से आलू गायब हो गया है. ज्यादातर स्कूलों में मध्याह्न् भोजन के दौरान प्रमुख व सस्ती सब्जी होने के कारण आलू का सर्वाधिक उपयोग हो रहा था, लेकिन जब से आलू के दाम बढ़े हैं, तब से बच्चों को आलू की सब्जी ही नहीं परोसी जा रही है. पखवाड़े भर से प्रदेश के ज्यादातर स्कूलों में बच्चों को आलू की सब्जी नसीब नहीं हो रही है.

सूबे के बालोद जिले में जगन्नाथपुर की महिला स्व-सहायता समूह की अध्यक्ष मथुरा बाई देशमुख बताती है कि बच्चों को एक सप्ताह से आलू की सब्जी नहीं दी जा रही है. देशमुख का कहना है कि स्कूल में 200 बच्चे हैं तथा हर दिन करीब 15 किलो आलू की खपत है. अभी आलू 40 रुपये किलो बिक रहा है. हरी सब्जी के दाम भी आसमान छू रहे हैं. इसीलिए बच्चों को सब्जी खिलाना मुश्किल हो रहा है.


उनका कहना है कि सब्जी कोई भी हो हर सब्जी में आलू मिलाया जाता है. हर स्कूल के मिड-डे मील में आलू की जरूरत पड़ती ही है. देशमुख का कहना है कि आलू के दाम बढ़ने के कारण मात्रा कम करनी पड़ रही है. सब्जी में बरबट्टी, पत्तागोभी, सेम आदि को मिलाकर सब्जी बनाई जा रही है.

देशमुख का साफ कहना है कि आलू के दाम इसी तरह से बढ़ते रहे तो सब्जी खिलाना बंद करना पड़ेगा. उनका कहना है कि सरकार ने भोजन का मीनू व राशि तो तय कर दी है पर कीमत बढ़ने के साथ ही उसमें बदलाव नहीं करती, जिसके कारण मीनू का पालन करने में दिक्कतें आती हैं. उन्होंने बताया कि हर दिन 15 किलोग्राम सब्जी बनाई जाती है जिसमें 10 किलो आलू व 5 किलो अन्य सब्जी होती थी, लेकिन अब 8 किलो आलू व 7 किलो दूसरी सब्जी मिलाकर सब्जी तैयार की जाती है.

आवक नहीं होने के कारण आलू की कीमत लगातार बढ़ रही है. व्यापारी किशोर आहूजा ने बताया कि छत्तीसगढ़ में आलू पश्चिम बंगाल व इलाहाबाद से आयात किया जाता है. पश्चिम बंगाल सरकार ने अन्य प्रदेशों में आलू के निर्यात पर रोक लगा दी है अभी सिर्फ इलाहाबाद से ही आलू निर्यात हो रहा है. आहूजा का कहना है कि जब तक पश्चिम बंगाल सरकार आलू के निर्यात से प्रतिबंध नहीं हटाती है तब तक कीमत कम होने की संभावना नहीं दिखाई देती.

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