नोकिया चेन्नई ईकाई की जब्ती बरकरार

नई दिल्ली | एेजेंसी: मोबाइल हैंडसेट बनाने वाली कंपनी नोकिया की चेन्नई इकाई को माइक्रोसॉफ्ट को हस्तांतरित करने की योजना अभी परवान नहीं चढ़ पाएगी, क्योंकि सर्वोच्च न्यायालय ने शुक्रवार को नोकिया की एक याचिका को रद्द कर दी.

याचिका में दिल्ली उच्च न्यायालय के उस आदेश को चुनौती दी गई थी, जिसमें अदालत ने नोकिया की पैतृक कंपनी नोकिया फिनलैंड को एक अंडरटेकिंग देकर यह सुनिश्चित करने के लिए कहा था कि भविष्य में उसकी भारतीय इकाई पर किए जाने वाले किसी भी कर दावे को वह भरेगी.

चेन्नई इकाई नोकिया और माइक्रोसॉफ्ट इंटरनेशनल के बीच हुए 7.2 अरब डॉलर के सौदे का हिस्सा है.

उच्च न्यायालय ने अंडरटेकिंग देने के साथ अन्य शर्त लगाने के अलावा नोकिया से 2,250 करोड़ रुपये निलंबलेखा (एस्क्रो अकाउंट) में डालने के लिए भी कहा है.

न्यायमूर्ति अनिल आर. दवे और न्यायमूर्ति शिवाकीर्ति सिंह की पीठ ने याचिका रद्द की. याचिका में अदालत से अनुरोध किया गया था आयकर विभाग द्वारा उसकी संपत्ति की जब्ती समाप्त की जाए और वह 2,250 करोड़ रुपये या चेन्नई संपत्ति के लिए माइक्रोसॉफ्ट से मिलने वाली राशि में से जो भी अधिक होगी, उसे निलंबलेखा में जमा कर देगी.

सुनवाई की शुरुआत में नोकिया ने चेन्नई संपत्ति का आंतरिक मूल्यांकन प्रस्तुत किया, जबकि गुरुवार के आदेश में उसे निर्दिष्ट विशेषज्ञ का मूल्यांकन प्रस्तुत करने के लिए कहा गया था.

न्यायमूर्ति दवे ने नोकिया के वकील विकास श्रीवास्तव से पूछा, “संपत्ति का मूल्य किसने लगाया है? हमने आपको अधिकृत वेल्यूअर की मूल्यांकन रिपोर्ट पेश करने के लिए कहा था?”

अदालत ने नोकिया के मामले को संदेहास्पद बताया. इससे पहले महाधिवक्ता मोहन प्रसारण ने अदालत से कहा कि नोकिया इंडिया ने कोई लाभ नहीं दिखाया, लेकिन अपनी पैतृक कंपनी नोकिया फिनलैंड को 3,500 करोड़ रुपये का लाभांश दिया.

न्यायमूर्ति दवे ने कहा, “कोई लाभ नहीं हुआ. लाभांश का भुगतान किया गया. लाभांश आरक्षित राशि से दिया गया. इसमें कुछ संदेहास्पद लगता है.”

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