मनरेगा का डेढ़ अरब बकाया

बिलासपुर | संवाददाता: छत्तीसगढ़ में मनरेगा दम तोड़ रहा है. राज्य के लाखों मज़दूर अपने भुगतान के लिये दर-दर की ठोकरें खा रहे हैं. केंद्र सरकार से बजट में कटौती के बाद एक तो मज़दूरों को काम कम मिला. उल्टे जिन्होंने काम किया, उन्हें भुगतान नहीं मिल रहा है.

राज्य में मजदूरी भुगतान का हाल ये है कि 1 अरब रुपये से भी अधिक की रकम सरकार ने मजदूरों को दिया ही नहीं है. कई इलाकों में तो मज़दूरों की यह बकाया रक़म सालों से लंबित है.

मज़दूरों की सबसे अधिक रक़म बिलासपुर ज़िले में बकाया है. आंकड़ों की बात करें तो बिलासपुर ज़िले में 2642 लाख की रकम मजदूरी के मद में बकाया है. 581 लाख से भी अधिक की सामग्री का भुगतान बिलासपुर ज़िले में सरकार ने नहीं किया है.

जिन ज़िलों में मजदूरों के भुगतान बकाया हैं, उनमें दूसरे नंबर पर मुख्यमंत्री रमन सिंह का गृह ज़िला राजनांदगांव है राजनांदगांव में भी 1158 लाख रुपये की मज़दूरी बकाया है.

बीजापुर और कोरिया ऐसे ज़िले हैं, जहां मज़दूरों की कोई भी रकम बकाया नहीं है. मज़दूर नेता नंद कश्यप कहते हैं- “राज्य भर में 12233.88 लाख रुपये मज़दूरी की रक़म और 2476.87 लाख रुपये सामग्री की बकाया है. ऐसे में अगर सरकार अपने को ग़रीबों की हितैषी बताती है तो इससे अश्लील मज़ाक कुछ भी नहीं हो सकता है.”


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