ओबामा का भारत आना पाक लिये ‘बड़ी घटना’

इस्लामाबाद | एजेंसी: अमरीकी राष्ट्रपति बराक ओबामा भारत क्या आये पाकिस्तान के अखबारों ने इससे उनके देश को होने वाले नफा-नुकसान का आकलन करना शुरु कर दिया है. पाकिस्तान के अखबारों ने लिखा है कि भारत, अमरीका के लिये एक बड़ा बाजार है जहां अमरीकी हथियार बेचे जाने की संभावना है. पाकिस्तान के अखबारों ने यहां तक टिप्पणी की है कि यदि भारत, अमरीका से हथियार खरीदता है तो अमरीका के आर्थिक संकट को कम कर सकता है. इन तमाम संभावनाओं के बीच पाक अखबार पाकिस्तान की भूमिका का आकलन कर रहें हैं. पाकिस्तान के प्रमुख समाचार पत्रों ने अमरीका के राष्ट्रपति बराक ओबामा के भारत दौरे को ‘बड़ी घटना’ करार दिया है. अखबारों ने यह भी कहा है कि इस्लामाबाद को सुनिश्चित करना होगा कि भारत-अमरीका संबंधों के नए युग की शुरुआत का खामियाजा इसे न भुगतना पड़े. पाकिस्तान के प्रमुख समाचार पत्रों- ‘डेली टाइम्स’, ‘द न्यूज’ और ‘डॉन’ ने रविवार को अपने-अपने संपादकीय में ओबामा के भारत दौरे का जिक्र किया है.

समाचार पत्र ‘डेली टाइम्स’ की संपादकीय के अनुसार, “ओबामा का गणतंत्र दिवस के अवसर पर भारत जाना बड़ी घटना है.”


अखबार के मुताबिक, “पाकिस्तान, भारत और अमरीका के बीच एक त्रिकोण बन गया है. अमरीका की नीति भारत और पाकिस्तान दोनों के साथ मित्रवत संबंध बनाने की रही है, न कि एक की कीमत पर दूसरे का साथ देने की. मंदी के दौरान भारत में मौजूद प्रचुर आर्थिक संभावनाएं अमरीका के लिए महत्वपूर्ण हैं.”

संपादकीय में कहा गया है कि भारत, अमरीका के लिए वास्तव में बड़ा बाजार है, जिसकी अर्थव्यवस्था भारत में हथियारों की बिक्री के साथ मुश्किलों से उबर सकती है.

समाचार पत्र कहता है कि अमरीका क्षेत्र में भारत को चीन के बराबर मानता है.

संपादकीय के अनुसार, “पाकिस्तान के संदर्भ में अमरीका और पाकिस्तान के बीच विश्वास की कमी की वजह पाकिस्तान की पूर्व की नीतियों में दोहराव रहा है, और अच्छे और बुरे तालिबान की अवधारणा को दरकिनार करते हुए आतंकवादियों के खिलाफ चलाए गए अभियान के बावजूद यह संशय बरकरार है.”

अखबार कहता है कि पाकिस्तान सरकार को अभी भी तालिबान को समर्थन देने वाले तत्वों से निपटने का उपाय नहीं सूझ रहा.

‘डेली न्यूज’ हालांकि, यह भी कहता है कि अमरीका पाकिस्तान की मुश्किलें जानता है और मानता है कि आतंकवाद सिर्फ सैन्य अभियान के जरिए खत्म नहीं हो सकता और इसलिए वाशिंगटन ने पाकिस्तान को आर्थिक मदद देना बंद नहीं किया है.

एक अन्य प्रमुख समाचार पत्र ‘द न्यूज’ के मुताबिक, ओबामा दौरे का एजेंडा मूल रूप से आर्थिक रहेगा.

अखबार के मुताबिक, “भारत क्षेत्र में मुख्य शक्ति बनने के लिए फिलहाल चीन के साथ लड़ रहा है और अमरीका का भारत की तरफ मुड़ने का संकेत बीजिंग में अच्छा नहीं माना जाएगा.”

संपादकीय यह भी कहता है कि पाकिस्तान के लिए चिंता का विषय आर्थिक सहयोग भी हो सकता है.

‘डॉन’ ने अपने संपादकीय में कहा है, “भारत के अधिकारी वर्ग और इसकी अपेक्षाकृत राष्ट्रवादी मीडिया संभवत ओबामा से पाकिस्तान को लेकर बयान मांगने की कोशिश करेगी और भारत द्वारा अन्य अमरीकी अधिकारियों का इस्तेमाल पाकिस्तान को अधिक नकारात्मक रूप में पेश करने के लिए किया जा सकता है.”

समाचार पत्र कहता है कि पाकिस्तान और भारत को इस तरह के अनवरत और अर्थहीन प्रतियोगिता से बचने की जरूरत है.

संपादकीय के अनुसार, “अगर ओबामा भारत जाते हैं, तो यह भारत का मामला है, अगर वह पाकिस्तान का दौरा करते हैं, तो यह पाकिस्तान का द्विपक्षीय मुद्दा होना चाहिए.”

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