धान खरीद पर सदन में हंगामा

रायपुर |छत्तीसगढ़ संवाददाता: छत्तीसगढ़ में धान खरीदी में अनियमितता का मामला सोमवार को विधानसभा में जोर-शोर से उठा. सत्ता पक्ष के सदस्य देवजी भाई पटेल द्वारा लाए गए ध्यानाकर्षण प्रस्ताव पर चर्चा में विपक्ष कांग्रेस के सदस्यों ने पूरे मामले की सदन की समिति से जांच की मांग की. खाद्य मंत्री पुन्नूलाल मोहले द्वारा सहमत नहीं होने पर विपक्षी सदस्यों ने सदन से वाकआउट कर दिया.

मंत्री श्री मोहले ने अपने जवाब में स्वीकार किया कि पिछले तीन सालों में लगभग सवा दो लाख टन धान की सूखत दर्ज की गई है. उन्होंने यह भी कहा कि धान में कमी और खराब होने के मामले में कई कर्मचारियों के खिलाफ बर्खास्तगी, निलंबन और जुर्म दर्ज कराने की कार्रवाई की गई है.

देवजी भाई पटेल ने ध्यानाकर्षण प्रस्ताव के माध्यम से प्रदेश में धान खरीदी में अनियमितता का मामला उठाया. उन्होंने खाद्य मंत्री से पूछा कि पिछले तीन साल में जो धान खरीदी हुई है उसके स्कंध का मिलान किया गया है या नहीं. फरवरी 2013 के सत्र में उनके प्रश्न के जवाब में बताया गया था कि कई लाख टन धान का मिलान नहीं हुआ है. उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि हजारों टन धान की चोरी हो चुकी है. इसका कोई हिसाब नहीं है.

खाद्य मंत्री पुन्नूलाल मोहले ने अपने जवाब में कहा कि 2010-11 से 2012-13 के बीच यानि पिछले तीन सालों में जितने धान की खरीदी हुई है उसका मिलान कर लिया गया है. उन्होंने कहा कि 2010-11 में 51 लाख टन से ज्यादा धान की खरीदी हुई थी. इसमें 41 हजार 157 टन धान सूखना पाया गया है.

2011-12 में 59 लाख टन से ज्यादा की खरीदी हुई थी जिसमें से 72 हजार 658 टन धान सूखत में दर्ज किया गया. यह कुल खरीदे गए धान का लगभग 1.22 फीसदी है. इसी तरह 2012-13 में 71 लाख 36 हजार टन से ज्यादा धान की खरीदी हुई. इसके मिलान करने पर 1 लाख 12 हजार टन धान सूखना पाया गया. यह कुल मात्रा के 1.57 फीसदी के बराबर है.

उन्होंने यह भी स्वीकार किया कि 2012-13 में 24 हजार टन से ज्यादा धान खराब हो गया. उन्होंने कहा कि धान खराब होने से जो घाटा हुआ है उसके लिए समिति जिम्मेदार है. भाजपा सदस्य देवजी भाई पटेल ने खाद्य मंत्री से पूछा कि क्या वे अनियमितता की सदन की समिति से जांच कराएंगे.

भाजपा सदस्य बद्रीधर दीवान ने भी आरोप लगाया कि समितियों में धान की जो खरीदी हुई है उसका उठाव नहीं हो रहा है. उन्होंने धान खराब होने के मामले में मंत्री द्वारा दिए गए जवाब को गलत बताते हुए कहा कि राज्य में लाखों टन धान बर्बाद हुआ है.

उन्होंने मंत्री से पूछा कि अव्यवस्था को दुरूस्त करने के लिए वे क्या कदम उठाएंगे. कांग्रेस सदस्य धनेन्द्र साहू ने कहा कि हर साल 15 हजार करोड़ की धान खरीदी हो रही है. इसमें बड़े पैमाने पर अनियमितता हो रही है क्या वे इसकी सदन की समिति से जांच कराएंगे. मंत्री श्री मोहले ने कहा कि जहां अनियमितता हुई है या धान में ज्यादा कमी पाई गई वहां कर्मचारियों पर कार्रवाई की गई है.

श्री मोहले ने बताया कि 2011-12 में 18 कर्मचारी सेवा से बर्खास्त किए गए हैं. 13 को निलंबित किया गया है और कई के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराई गई है. इसी तरह 2012-13 में भी 18 कर्मचारियों को बर्खास्त किया गया है. दो के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराई गई है और 69 कर्मचारियों को वसूली के लिए नोटिस जारी किए गए हैं. 227 अन्य कर्मचारियों को भी नोटिस दिए गए हैं.

उन्होंने बताया कि जिन केंद्रों में निर्धारित से ज्यादा धान सूखना पाया गया है वहां के कर्मचारियों पर भी कार्रवाई की गई है. कांग्रेस सदस्य धनेन्द्र साहू, रेणु जोगी, उमेश पटेल, सत्यनारायण शर्मा एवं नेता प्रतिपक्ष टीएस सिंहदेव ने इस पूरे मामले की सदन की समिति से जांच की मांग की. मंत्री द्वारा जांच के लिए सहमत न होने पर सदस्यों ने सदन से वाकआउट कर दिया.

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