लखवी के रिहाई का विरोध

नई दिल्ली | समाचार डेस्क: आतंकी सरगना लखवी को रिहा करने के मामले का भारत के राजनीतिक दलों ने विरोध किया है. पाकिस्तान की एक अदालत द्वारा 26/11 मुंबई आतंकवादी हमले के कथित सरगना जकी-उर-रहमान लखवी की तत्काल रिहाई के आदेश पर भारत की राजनीतिक पार्टियों ने कड़ी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए कहा है कि पाकिस्तान को साल 2008 हमले के साजिशकर्ताओं को न्याय के कठघरे में लाया जाना सुनिश्चित करना होगा. समाचार वेबसाइट डान ऑनलाइन की एक रिपोर्ट के मुताबिक, लाहौर उच्च न्यायालय ने लखवी के हिरासत आदेश को खारिज कर दिया और उसे तत्काल रिहा करने का आदेश दिया.

न्यायालय लखवी की चौथी याचिका पर सुनवाई कर रहा था, जिसमें उसने पिछले महीने पंजाब सरकार के एक महीने के हिरासत आदेश को चुनौती दी थी.

एक अदालत द्वारा लखवी को रिहा करने के आदेश के बाद उसकी रिहाई से पहले ही पंजाब सरकार ने पिछले महीने उसे हिरासत में ले लिया था.

पंजाब सरकार ने अपने रुख पर कायम रहते हुए कहा कि खुफिया एजेंसियों द्वारा मिली संवेदनशील सूचनाओं के आधार पर ही लखवी को हिरासत में रखा गया है.

न्यायाधीश अनवारूल हक ने सरकार के वकील को सूचनाओं के उस रिकॉर्ड को अदालत को सौंपने के लिए कहा, जिसे इस्लामाबाद उच्च न्यायालय में भी प्रस्तुत किया गया था और उसके आधार पर न्यायालय ने लखवी को जमानत दी थी.

लखवी उन सात लोगों में शामिल है, जिनपर साल 2008 में मुंबई हमले का षडयंत्र रचने व हमले में मदद करने का आरोप है, जिसमें 166 लोग मारे गए थे, जबकि लगभग 300 लोग घायल हुए थे. छह अन्य लोगों- हम्माद अमीन सादिक, शाहिद जमील रियाज, यूनस अंजुम, जमील अहमद, मजहर इकबाल तथा अब्दुल माजिद- के खिलाफ सुनवाई चल रही है.

न्यायालय ने अपने रुख पर कायम रहते हुए कहा कि अगर ये संवेदनशील सूचनाएं विश्वसनीय होतीं, तो इस्लामबाद उच्च न्यायालय लखवी की जमानत याचिका को कभी मंजूर नहीं करता.

इसीलिए, संवेदनशील सूचनाओं में विश्वसनीयता की कमी के आधार पर लाहौर उच्च न्यायालय ने लखवी को रिहा करने का आदेश दिया और उसे रावलपिंडी के अदियाला जेल को 20 लाख रुपये की जमानत राशि देने का निर्देश दिया. वर्तमान में वह इसी जेल में बंद है.

एक महीने के अंदर लगातार दूसरी बार पाकिस्तानी अदालतों ने लखवी की हिरासत के आदेश को खारिज किया है.

इस्लामाबाद उच्च न्यायालय द्वारा पिछले महीने लखवी की हिरासत के आदेश को अवैध घोषित किए जाने व उसे तत्काल रिहाई के आदेश पर भारत ने पाकिस्तान उच्चायुक्त को बुलाकर अपना विरोध दर्ज किया था.

पेशावर के स्कूल पर बीते साल 16 दिसंबर को आतंकवादी हमले के बाद लखवी की जमानत को भारत ने दुर्भाग्यपूर्ण करार दिया था.

माना जाता है कि मुंबई हमले के वक्त लखवी प्रतिबंधित लश्कर-ए-तैयबा का कार्यवाहक प्रमुख था. भारत ने इस हमले के लिए लश्कर को ही जिम्मेदार ठहराया है.

लखवी की रिहाई के आदेश पर प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए भारतीय जनता पार्टी के प्रवक्ता जी.वी.एल.नरसिम्हा राव ने कहा कि मुंबई हमले में न्याय पाकिस्तान के लिए एक परीक्षा की तरह है, क्योंकि उसने दावा किया है कि वह अच्छे तथा बुरे आतंकवादियों में कोई फर्क नहीं करता.

उन्होंने आईएएनएस से कहा, “मुंबई हमले के साजिशकर्ताओं को न्याय के कठघरे में लाना दोनों देशों के बीच विश्वास बहाली के उपायों का हिस्सा है.”

वहीं, कांग्रेस के प्रवक्ता संजय झा ने कहा, “पाकिस्तान-भारत के बीच द्विपक्षीय रिश्तों पर आतंकवादी हमलों के मामले का असर पड़ने जा रहा है. पाकिस्तान जबतक न्याय सुनिश्चित नहीं करता, इसमें सुधार की कोई गुंजाइश नहीं.”

कांग्रेस नेता मनीष तिवारी ने कहा कि अगर केंद्र में संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन की सरकार सत्ता में होती, तो लखवी को पाकिस्तानी अदालतों से बार-बार जमानत नहीं मिलती.

उन्होंने नरेंद्र मोदी की सरकार पर आतंकवाद के खिलाफ ढीला-ढाला रवैया अपनाने का आरोप लगाया और कहा कि कश्मीर में भाजपा गठबंधन सरकार के सत्ता में आने के बाद ही कश्मीरी अलगाववादी मसरत आलम भी रिहा हुआ.

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