पंडवानी मतलब झाड़ूराम देवांगन

रायपुर | समाचार डेस्क: प्रख्यात पंडवानी गायक झाडूराम देवांगन छत्तीसगढ़ी लोक संगीत पंडवानी के पितामह कहे जाते हैं. पंडवानी को पूरे देश में प्रसिद्ध करने का श्रेय उन्हीं को जाता है. झाडूराम का जन्म भिलाई के निकट ग्राम बासिन में वर्ष 1927 में हुआ था. 9 वर्ष की उम्र में इनके माता-पिता का निधन हो गया था. 12 वर्ष की उम्र में इन्होंने पंडवानी का गायन शुरू किया. इन्हें पंडवानी की प्रेरणा सब्बल सिंह चौहान की छत्तीसगढ़ी महाभारत पढ़कर मिली. वर्ष 1964 में उन्होंने भोपाल आकाशवाणी से पंडवानी का गायन किया था.

छत्तीसगढ़ सरकार ने उन्हें पंडवानी के पितामह व तुलसी सम्मान से भी नवाजा है. सन् 1975 से 1985 के बीच वे अपने शिष्यों के साथ विदेशों में भी अपनी कला का प्रदर्शन कर चुके हैं. प्रसिद्ध पंडवानी गायिका पद्मश्री तीजन बाई उन्हीं की शिष्या हैं. वर्तमान में पुनउराम निषाद, चेतना दास, प्रभा यादव आदि पंडवानी की पहचान बनाए हुए हैं.


प्रदेश में लोक कलाकारों को सम्मान देने की कड़ी में दुर्ग डाक संभाग की ओर से एक और पहल की जा रही है. यहां अगले माह होने वाले फिलाटलिक प्रदर्शनी में झाडूराम की स्मृति में दुर्ग डाक संभाग के फिलाटलिक ब्यूरो की ओर से विशेष लिफाफा जारी किया जाएगा. इस विशेष लिफाफे का अनावरण छत्तीसगढ़ डाक परिमंडल के पोस्ट मास्टर जनरल करेंगे.

दुर्ग डाक संभाग के प्रवर अधीक्षक आशीष सिंह ठाकुर ने बताया कि फिलाटलिक ब्यूरो द्वारा डाक टिकटों की प्रदर्शनी जुलाई में आयोजित होगी. इस मौके पर विशेष आवरण निकाला जाना है. इसमें पंडवानी के पितामह कहे जाने वाले झाडूराम देवांगन पर विशेष आवरण निकालने की तैयारी की जा रही है.

उल्लेखनीय है की इससे पहले 10 व 11 मार्च 2013 को भी दुर्ग डाक संभाग की ओर से लोक कलाकार देवदास बंजारे व सांस्कृतिक कलाकार सुब्रत बोस पर विशेष लिफाफा जारी किया जा चुका है. इसी कड़ी में इस वर्ष झाडूराम देवांगन की स्मृति में विशेष लिफाफ जारी किया जाएगा. झाडूूराम देवांगन के पुत्र कुंज बिहारी देवांगन ने भी अपने पिता की स्मृति में निकलने वाले विशेष लिफाफे के लिए अपनी सहमति दे दी है.

विगत वर्षो में दुर्ग डाक संभाग के फिलाटलिक ब्यूरो की ओर से भिलाई इस्पात संयंत्र, कवर्धा स्थित भोरम देव मंदिर, खैरागढ़ स्थित इंदिरा गांधी कला एवं संगीत विश्वविद्यालय पर भी विशेष आवरण निकाला जा चुका है.

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