मुजफ्फरनगर के शांति दूत

मुजफ्फरनगर | एजेंसी: मुजफ्फरनगर प्रसाशन ने शांतिदूतो को सम्मानित करने का निर्णय लिया है जिन्होंने देगे के समय सराहनीय कीर्य किये हैं. उत्तर प्रदेश के मुजफ्फरनगर में भड़की हिंसा में एक-दूसरे के खून के प्यासे होकर घूम रहे लोगों के बीच कुछ ऐसे चेहरे भी रहे हैं जिन्होंने अपनी जान पर खेलकर न सिर्फ अपने क्षेत्र में नफरत की आग फैलने से रोकी बल्कि इंसानियत के रास्ते पर चलकर पीड़ितों की मदद की और अमन का झंडा बुलंद किया. जिला प्रशासन ने ऐसे शांति दूतों को सम्मानित करने का निर्णय लिया है.

हिंसा भड़कने के बाद प्रशासन अब मुजफ्फरनगर और आस-पास अमन बहाली की दिशा में प्रयासरत है. ऐसे में उन लोगों को समाज के आगे नजीर बनाकर पेश किए जाने का फैसला किया गया है जिनकी भूमिका हिंसा के दौरान अत्यंत सराहनीय रही.

लिसाढ़ में प्रधान बिजेंद्र सिंह ने अपने घर में 150 अल्पसंख्यकों को शरण देकर उनकी जान बचाई. दुलहेरा में प्रधान संजीव बालियान की अगुवाई में 300 मुसलमानों को हिंसा के दौरान हिफाजत से रखा गया और बाद में सुरक्षित स्थान तक पहुंचाया गया. इसी तरह खतौली में एक मुस्लिम परिवार द्वारा हिंदुओं की रक्षा की गई. हिंसा के दौरान आपसी भाईचारे की ऐसी कई कहानियां सामने आईं.

जिला प्रशासन ने निर्णय लिया है कि हिंसा के दौरान दंगाइयों के भड़कावे में न आकर लोगों की जान बचाने वालों को सम्मानित किया जाएगा.

जिला प्रशासन के एक अधिकारी ने कहा कि हिंसा के दौरान भाईचारा और इंसानियत का रास्ता अपनाने वाले ऐसे लोगों की सूची तैयार की जा रही है. शासन की मंजूरी के बाद इन लोगों को सम्मानित किया जाएगा.

सहारनपुर परिक्षेत्र के मंडलायुक्त भुवनेश कुमार ने कहा कि ऐसे लोगों को सम्मानित करने के पीछे मकसद है कि समाज में ये दूसरों के लिए मिसाल बन सकें. इनकी इंसानियत की दास्तां जानने के बाद समाज के अन्य लोग भी ऐसा करने के लिए प्रेरित हों.

गौर तलब है कि दंगो में करीब 40 लोग मारे गये थे. ऐसे में करीब 450 लोगों की जान बचाने वाले वाकई में शांति के दूत हैं.

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