पेंड्रावन जलाशय अल्ट्राटेक के हवाले?

रायपुर | संवाददाता: छत्तीसगढ़ का पेंड्रावन जलाशय फिर से अल्ट्राटेक सीमेंट के हवाले हो सकता है.इससे पहले सरकार ने अल्ट्राटेक को इस जलाशय में खनन की मंजूरी रद्द कर दी थी. लेकिन जब मामला हाईकोर्ट पहुंचा तो इस मामले में सरकार ने अपनी ओर से कोई जवाब ही नहीं दिया. इसके बाद हाईकोर्ट से अल्ट्राटेक को अंतरिम राहत मिल गई है. हाईकोर्ट ने राज्य शासन को नोटिस भी जारी किया है लेकिन सरकार पिछले महीने भी जवाब पेश करने में असफल रही है.

गौरतलब है कि राज्य सरकार ने रायपुर के ज़िले के तिल्दा में स्थित पेंड्रावन जलाशय को अल्ट्राटेक कंपनी को लाईम स्टोन खनन के लिए दे दिया था. पूर्व में जलसंधान विभाग के समस्त पत्राचार और प्रतिवेदन में इस खनन परियोजना को अनुमति देने का सख्त विरोध किया गया था. लेकिन सरकार ने अपने ही विभागों की सारी आपत्तियों को किनारे करते हुये 3 जनवरी को अल्ट्राटेक कंपनी को एनओसी जारी कर दी गई. सामाजिक कार्यकर्ताओं का कहना था कि यह खनन बांध के केचमेंट क्षेत्र में हैं और खनन होने से केचमेंट मात्र 32.9 प्रतिशत ही बचेगा अर्थात एक 100 साल पुराने बांध का विनाश सुनिश्चित है.


राज्य भर में विरोध के बाद 3 मार्च को सरकार ने अल्ट्राटेक को जारी एनओसी को निरस्त कर दिया था. जिसके खिलाफ अल्ट्राटेक कंपनी ने हाईकोर्ट में याचिका लगाई थी, जिसमें 19 मई को ही हाईकोर्ट ने कंपनी को राहत दे दी थी. लेकिन दिलचस्प ये है कि इस मामले में सरकार ने अब तक जवाब पेश नहीं किया.

हालांकि किसानों की ओर से इस मामले में एक जनहित याचिका भी दायर की गई है. लेकिन सरकार की ओर से जवाब पेश नहीं किये जाने को लेकर कई कयास लगाये जा रहे हैं. छत्तीसगढ़ में सरकार नदियों और जलाशयों को निजी कंपनियों के हवाले करती रही हैं. कई चेक डैम और जलाशय तो खेती किसानी के नाम पर बनाये गये लेकिन उन्हें भी उद्योगों को दे दिया गया.

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