छत्तीसगढ़ के अस्मत के सौदागर गिरफ्तार

रायपुर | संवाददाता: राज्य की 7 लड़कियों को इलाहाबाद से अस्मत के सौदारों के चंगुल से आज़ाद कराया गया है. छत्तीसगढ़ की इन भोली-भाली लड़कियों को काम दिलाने तथा अच्छी नौकरी का झूठा ख्वाब दिखाकर उत्तरप्रदेश ले जाया गया था. जहां से बालोद पुलिस ने उन्हें छुड़ाया है तथा अस्मत के सौदागरों को गिरफ्तार किया है. छुड़ाई गई लड़कियों में से 3 जांजगीर-चांम्पा जिले की हैं.

छत्तीसगढ़ के बालोद जिले में मानव तस्करी का बड़ा मामला सामने आया है. इलाहाबाद में डांस के नाम पर देह-व्यापार में धकेली जा रही राज्य की 7 लड़कियों को पुलिस ने छुड़ाया है.


बालोद पुलिस को इस मामले में बड़ी सफलता मिली है. दो महिला आरोपी पकड़ी गई हैं. बताया जाता है कि राज्य की 14 लड़कियां इस गिरोह के चंगुल में थी.

छह लड़कियो को छुड़ाने व सरगना शेरू को पकड़ने के लिए टीम रवाना की गई है. इस मामले में कुल 7 लड़कियों को लाया गया, जो सभी नाबालिग हैं. इनमें बालोद की 1, कोरबा की 3 और 3 चांपा-जांजगीर की हैं. जहां से लड़कियों को गिरफ्तार किया गया वहां नेपाल और उत्तरांचल क्षेत्र की भी लड़कियां मिली हैं. अभी छत्तीसगढ़ से और लड़कियों के शामिल होने की सम्भावना है.

पुलिस के अनुसार नाबालिग लड़कियो को पैसे कमाने का जरिया बनाया गया था. जवाहरपारा की धनेश्वरी देवार इसकी मुख्य सूत्रधार थी. जो वैसे तो भीख मांगने का काम करती थी, किन्तु इसकी आड़ में वह ऐसी गरीब लड़कियों पर नजर रखती थी जिन्हें डान्स सिखाने का ऑफर देकर अच्छे काम में लगाने का लालच दिया जाता था.

इसके बाद इन लड़कियों को देह व्यापार के घिनौने कार्य में लगाने का काम सुरेश सोनकर नामक दलाल और इलाहाबाद में अपनी बहन पायल के माध्यम से करवाया जाता था. पीड़ित लड़कियों को मुक्त करवा लिया गया है.

पीड़ित लड़कियों ने इन दरिंदो के दहला देने वाले कृत्य को अपने मुख से बताया, जिसमें प्रमुख रूप से उनका सौदा कर बेच देना, खाने में नशीली गोलियों का सेवन करवाना, जबरदस्ती डांस के बहाने व्यभिचार के कार्यो में लगवा देना, आये दिन मारपीट करना आदि रोज का काम था.

उल्लेखनीय है कि छत्तीसगढ़ से पिछले 11 साल में 5000 लड़कियों की तस्करी कर केवल दिल्ली ले जाया गया. इसका खुलासा 19 नवंबर 2014 को दिल्ली के शकुरपुरा से गिरफ्तार कथित प्लेसमेंट एजेंसी से संचालक पन्नालाल ने पुलिस को लिखित बयान में बताया था. गौर करने वाली बात यह है कि यह वह आकड़ा है जिसे स्वीकार किया गया है वस्तुतः वास्तविक संख्या इससे कहीं ज्यादा की होगी.

साल 2014 में दिल्ली में गिरफ्तार लड़कियों के तस्कर ने स्वीकार किया था कि उसने 2003 से छत्तीसगढ के जशपुर तथा रायगढ़ से 5000 से भी ज्यादा लड़कियों की दिल्ली के लिये तस्करी की है.

जाहिर है कि एक दलाल ने प्रतिवर्ष छत्तीसगढ़ के 2 जिलों से करीब 454 लड़कियों की तस्करी की है अर्थात् प्रति 5 दिन में 6 बच्चों को अगुआ करके ले जाया गया है.

25 लाख बीपीएल परिवार वाला छत्तीसगढ़ मानव तस्करी कराने वालों के लिये मुरीद स्थान है. वे यहां की भोली-भाली लड़कियों को धन कमाने का लालच देकर दिगर राज्यों में ले जाते हैं तथा उन्हें वहां ऊंचे दामों में बेच देते हैं. वस्तुतः मानव तस्करी एक सामाजिक-आर्थिक समस्या है. जिसके मूल में गरीबी तथा अभाव है जो बेहतर जिंदगी जीने की चाह में इन अस्मत के सौदागरों के जाल में फंस जाते हैं.

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