नई योजना समिति में सीएम को शामिल करें

नई दिल्ली | एजेंसी: तमिलनाडु के मुख्यमंत्री पन्नीरसेल्वम ने योजना आयोग को खत्म करने का विरोध नहीं किया परन्तु इसमें मुख्यमंत्रियो को शामिल करने की बात कही. उल्लेखनीय है कि दिल्ली में रविवार को योजना आयोग के स्थान पर नये समिति के गठन पर मुख्यमंत्रियों की मीटिंग बुलाई गई थी. तमिलनाडु के मुख्यमंत्री ओ. पन्नीरसेल्वम ने रविवार को कहा कि योजना आयोग की जगह बनाई जाने वाली नई संस्था में मुख्यमंत्रियों को भी प्रतिनिधित्व मिलना चाहिए. उन्होंने कहा कि प्रस्तावित संस्था को क्षेत्रवार सामरिक दृष्टिकोण दस्तावेज तैयार करना चाहिए जो मध्यम और लंबी अवधि के परिप्रेक्ष्य का निर्दिष्ट करें. साथ ही उन्होंने वार्षिक योजना पर चर्चा को खत्म कर देने की वकालत की.

पन्नीरसेल्वम ने यह बातें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा योजना आयोग के पुनर्गठन पर राज्यों के मुख्यमंत्रियों का मत जानने के लिए बुलाई एक बैठक में कहीं.

पन्नीरसेल्वम ने कहा, “मैं आग्रह करता हूं कि नई संस्था को क्षेत्रवार सामरिक दस्तावेज बनाने चाहिए जो कि उस विशेष क्षेत्र को उसकी आकांक्षाओं के मुताबिक एक लंबी अवधि का परिप्रेक्ष्य प्रदान करे.”

साथ-साथ पांच साल के लिए मध्यम अवधि की योजना भी प्रासंगिक बनी रहे.

राजस्व के बंटवारे पर उन्होंने वित्त आयोग की सिफारिशों के आधार पर संविधान के अनुच्छेद 270 का हवाला देते हुए कहा कि केंद्र सरकार के लिए यह संभव है कि वह अपने कुल संसाधनों का 50 फीसदी राज्यों के साथ साझा कर सकता है.

उन्होंने कहा कि वित्तीय संसाधनों के बंटवारे में केवल इसी तरह के दूरगामी परिवर्तन राज्यों को विकास की प्रक्रिया में बराबर का भागीदार बनाएंगे.

उन्होंने केंद्र सरकार से यह भी आग्रह किया कि वह केंद्र प्रायोजित योजनाओं में राज्यों की सहायता करते वक्त अधिक से अधिक निष्पक्षता सुनिश्चित करें.

पन्नीरसेल्वम ने कहा, “इस तरह की योजनाओं में केंद्रीय सहायता के आवंटन के लिए अपनाए गए मापदंड में अधिक से अधिक निष्पक्षता रखनी चाहिए.”

तमिलनाडु के मुख्यमंत्री ने कहा कि बेहतर योजना बनाने और उनके कार्यान्वन के लिए धन आवंटन में अधिक स्पष्टता और निश्चितता की जरूरत है.


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