फर्जी गौरक्षकों पर बरसे मोदी

नई दिल्ली | समाचार डेस्क: प्रधानमंत्री मोदी रविवार को तेलंगाना में भी फर्जी गौरक्षकों पर जमकर बरसे. उन्होंने कहा, ”कुछ लोग समाज को तहस-नहस करने पर लगे हैं. वह हिंदुस्तान की एकता को तोड़ने पर लगे हैं.” तेलंगाना के मेढक में एनटीपीसी थर्मल पॉवर प्रोजेक्ट के पहले चरण के उद्घाटन के अवसर पर प्रधानमंत्री मोदी ने कहा, ”कुछ मुट्ठीभर लोग गौरक्षा के नाम पर समाज में तनाव लाने की कोशिश कर रहे हैं.”

मोदी ने कहा, “वो हमारी गायों की रक्षा की परवाह नहीं करते हैं. मैं राज्य सरकारों से अनुरोध करता हूं कि वो फर्ज़ी गौरक्षकों की लिस्ट तैयार करें और उनके ख़िलाफ़ कार्रवाई करें.”

इससे पहले शनिवार को प्रधानमंत्री मोदी ने अपने टाउनहाल कार्यक्रम में कहा था 80 फीसदी गौरक्षक फर्जी हैं तथा गोरखधंधों में लिप्त हैं.

देश में गौरक्षकों द्वारा गौरक्षा के नाम पर दलितों को पीटे जाने की घटनाओं के बाद प्रधानमंत्री मोदी से बयान की अपेक्षा की जा रही थी. उन्होंने लगातार दो दिनों तक फर्जी गौरक्षकों पर निशाना साधा.

प्रधानमंत्री मोदी के बयान पर उत्तर प्रदेश से भारतीय जनता पार्टी के सांसद डा. यशवंत सिंह ने बीबीसी से कहा, ” जब भी दलितों पर अत्याचार होता है उनकी एक अपेक्षा होती है कि दलित समुदाय का कोई न कोई व्यक्ति उनकी बात रखेगा. हम लोगों ने उनकी बात उठाई. हमारे संरक्षक प्रधानमंत्री हैं. मैं नहीं मानता कि हमारी वजह से उन्होंने ऐसा कहा है लेकिन उनकी दृष्टि सही है. ”

उधर, कांग्रेस नेता सत्यव्रत चतुर्वेदी का कहना है कि “उन्हीं की पार्टी और संघ से जुड़े संगठन इसका नेतृत्व करते आ रहे हैं. ये कहना कि इसमें असामाजिक तत्व जुड़ गये हैं, एक तरह से ये उनको बचाने जैसा दिखता है. अगर प्रधानमंत्री वास्तव में ईमानदार हैं तो प्रधानमंत्री बतायें कि उन्होंने और सरकार ने क्या कार्रवाई की है. उन राज्यों में जहां भारतीय जनता पार्टी की सरकारें हैं, वहां ऐसे लोगों पर भविष्य में कठोर कार्रवाई होगी इस बात का विश्वास दिलायें.”

वरिष्ठ पत्रकार रामकृपाल सिंह ने बीबीसी से कहा, “मुझे उम्मीद थी कि जब भी मोदी इस पर मुंह खोलेंगे तो यही कहेंगे. ये ठीक है कि वो आरएसएस से जुड़े रहे हैं. हिंदूवादी हैं. लेकिन जब मोदी गुजरात के मुख्यमंत्री थे, अहमदाबाद में विवादित धर्मस्थलों पर उन्होंने सबसे पहले कार्रवाई की थी.”

ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन के प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने इस मुद्दे पर प्रधानमंत्री के बयान में देरी पर सवाल उठाया और कहा कि सिर्फ कुछ शब्द काफी नहीं होंगे. मोदी को दलितों और मुसलमानों में असुरक्षा के भाव को हटाना पड़ेगा.

उन्होंने कहा, “सवाल यह है कि क्या ये महज कुछ शब्द हैं. प्रधानमंत्री को राज्यों में अपने ही लोगों, अपनी पार्टी और भाजपा सरकारों पर लगाम लगानी होगी.”

ओवैसी ने कहा, “जब अखलाक को मारा गया, प्रधानमंत्री ने कुछ नहीं कहा. झारखंड में दो मुसलमानों को मारने की घटना पर भी वह चुप रहे. जम्मू के एक ट्रक चालक की मौत की खबर पर भी प्रधानमंत्री चुप रहे.”

उन्होंने कहा कि गुजरात के उना में दलितों पर उत्पीड़न का वीडियो देश के घर-घर तक पहुंच गया है, इसलिए प्रधानमंत्री को मजबूरन बोलना पड़ा है.

ओवैसी ने कहा कि ये सभी घटनाएं उन राज्यों में हुई हैं जहां भाजपा सत्ता में है या संगठनात्मक रूप से मजबूत है.

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