पुलिस पर नक्सलियों का खौफ भारी

रायपुर: बस्तर में नक्सलियों के खौफ का आलम ये है कि पुलिस के अधिकांश जवानों के लिये वह अब भी काले पानी का पर्याय बना हुआ है. बस्तर तबादला होने पर कई पुलिस के जवान और अधिकारी लगातार यह कोशिश करते रहते हैं कि उन्हें बस्तर नहीं जाना पड़े. सैकड़ों जवान और अधिकारियों ने तो बस्तर तबादला होने पर इस्तीफा तक दे दिया तो सैकड़ों लोग ड्यूटी पर पहुंचे ही नहीं. मानसिक दबाव झेल रहे दर्जनों जवानों ने आत्महत्या कर ली. हालत ये है कि प्रशिक्षण के बाद सिपाही के पद से सीधे बस्तर में थाना प्रभारी बनाये जाने के प्रस्ताव पर भी जवानों में कोई खास प्रतिक्रिया नजर नहीं आई.

विधानसभा में बुधवार को चर्चा के दौरान यह तथ्य सामने आया कि 2006 से इस साल जनवरी तक सीएएफ के 138 जवानों ने इस्तीफा दे दिया. इस दौरान इस्तीफा देने वाले अधिकारियों की संख्या 8 है. इसी तरह जिला पुलिस बल के 5 अधिकारियों ने बस्तर में इस्तीफा दे दिया. जबकि इस्तीफा देने वाले जिला पुलिस बल के जवानों की संख्या 75 है.


बस्तर में तबादला होने के बाद ड्यूटी से अनुपस्थित रहने वाले पुलिस के जवानों की संख्या सैकड़ों में है. सीएएफ के 140 जवान और 5 अधिकारी लंबी अवधि से अनुपस्थित हैं. इसी तरह जिला बल के 78 जवान और 6 अधिकारी अब तक ड्यूटी से लापता हैं. बस्तर में पदस्थ होने के बाद आत्महत्या करने वाले पुलिस के जवानों की संख्या भी कम नहीं है. जिला पुलिस बल के 20 जवान और 3 अधिकारियों ने इस दौरान आत्महत्या कल ली. इसी तरह सीएएफ के 3 जवानों ने भी आत्महत्या कर ली.

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