बाइकर्स को क्यों मारी गोली?

नई दिल्ली: क्या पुलिस पर कथित रुप से पथराव करने वाले स्टंट बाइकर को गोली मारना पुलिस के पास एकमात्र विकल्प था? पुलिस ने इससे पहले बाइकर्स पर अश्रु गैस के गोले क्यों नहीं बरसाये या फिर पानी की बौछार कर के उन्हें काबू में लाने की कोशिश क्यों नहीं की ? ये और इससे मिलते जुलते कई सवाल हैं, जिन्होंने पुलिस कार्रवाई को संदेह के घेरे में खड़ा कर दिया है.

गौरतलब है कि दिल्ली पुलिस ने देर रात उत्पात मचा रहे एक स्टंट बाइकर को गोली मार दी थी, जिससे उसकी घटनास्थल पर ही मौत हो गई थी. मारे गये युवक की पहचान दक्षिण दिल्ली के मालवीय नगर निवासी करण पांडे के तौर पर हुयी. करण को की रविवार सुबह लगभग 2.30 बजे संसद मार्ग पर स्थित ली मेरेडियन होटल के पास गोली मारी गई थी. 20 वर्षीय मृतक करन पांडे, पुनीत शर्मा की मोटरसाइकिल पर पीछे बैठा था. इस घटना में पुनीत भी घायल हुआ था.


पुलिस को रविवार सुबह 2 बजे के आसपास सूचना मिली कि संसद मार्ग पर स्थित गोल डाकखाना के पास लगभग 35 से 40 मोटरसाइकिल सवार युवक खतरनाक स्टंट कर रहे हैं.

दिल्ली पुलिस के प्रवक्ता राजन भगत के अनुसार जब पुलिस स्थल पर पहुंची, बाइकर्स ली मेरेडियन होटल की ओर भागे जहां वहा एकजुट होकर पुलिस पीसीआर वैनों पर पत्थर फेंकने लगे. भगत ने बताया कि पुलिस ने टायरों पर गोली चलाई. इस प्रक्रिया में एक गोली पांडे को लग गई. उसे राम मनोहर लोहिया अस्पताल ले जाया गया, जहां उसकी मौत हो गई. पुलिस के मुताबिक चिकित्सकीय परीक्षण ने पाया गया है कि पुनीत शर्मा शराब के नशे में था.

हालांकि पुलिस इस पूरे मुद्दे पर बचाव की मुद्रा में है लेकिन उसके पास इस बात का कोई जवाब नहीं है कि आखिर अंतिम विकल्प के तौर पर इस्तेमाल की जाने वाली गोली चालन को पहले विकल्प के तौर पर पुलिस ने क्यों इस्तेमाल किया. पुलिस के अधिकांश अफसर इस सवाल से बचने की कोशिश कर रहे हैं.

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