सिमी आरोपियों की जमानत को चुनौती मिलेगी

रायपुर | एजेंसी: प्रतिबंधित संगठन सिमी से संबंध रखने के मामले में आरोपी बनाए गए अजहर उर्फ अजहरुद्दीन और मोइनुद्दीन को जमानत मिलने से छत्तीसगढ़ के पुलिस महकमे की किरकिरी हुई है.

पुलिस विभाग जमानत को उच्च न्यायालय में चुनौती देने की तैयारी में है. अभियोजन पक्ष जमानत आदेश की कॉपी मिलने के बाद उच्च न्यायालय में अपील की प्रक्रिया शुरू करेगा.


पुलिस अधिकारियों ने बताया कि उच्च न्यायालय में अगर अभियोजन पक्ष की अपील मंजूर कर ली जाती है तो रिहा आरोपी फिर जेल जा सकते हैं. लेकिन अपील खारिज हुई तो शासन के पास केवल सर्वोच्च न्यायालय जाने का रास्ता बचेगा. इन सभी मुद्दों पर अभियोजन ने मंथन शुरू कर दिया है.

लोक अभियोजन के उपसंचालक रामकुमार सिंह ठाकुर का कहना है कि सत्र न्यायालय के आदेश के खिलाफ उच्च न्यायालय में अपील की जाएगी. आदेश की प्रति हासिल की जा रही है.

उन्होंने कहा, “हम हाईकोर्ट तक जा सकते हैं. इसके बाद आगे की कार्रवाई राज्य शासन पर निर्भर है.”

सिमी मामले में दो आरोपियों की जमानत मिलने के पीछे डिस्ट्रिक्ट प्रोसिक्यूशन आफिसर (डीपीओ) और गवर्नमेंट प्लीडर (जीपी) में संवादहीनता की कमी को कारण माना जा रहा है.

अभियोजन अधिकारियों का कहना है कि उन्हें यह तक नहीं जानकारी थी कि निचली अदालत के इस आदेश को सत्र न्यायालय में चुनौती दी गई है. दो आरोपियों को जमानत मिलने के बाद डीपीओ को जानकारी मिली. विधि विरुद्ध क्रियाकलाप के मामले में पुलिस को चार्जशीट पेश करने के लिए 90 दिन का अतिरिक्त समय दिया जाता है. इस मामले की केस डायरी पुलिस ने अभियोजन स्वीकृति के लिए गृह मंत्रालय भेजी है. इसीलिए शनिवार को इसे अदालत में पेश नहीं किया जा सका. अदालत ने अब 24 मार्च तक का समय दिया है.

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