अलविदा, योजना आयोग

नई दिल्ली | समाचार डेस्क: नये साल से विकास के लिये नीति आयोग का गठन किया गया है. केन्द्र सरकार के विज्ञप्ति से स्पष्ट है कि आने वाले समय में देश के विकास के लिये यह आयोग नीतियां तय करेगा. जाहिर है कि अब योजनाबद्ध विकास को नये साल से तिलांजलि दे दी गई है. वैसे भी बाजार पर आधारित अर्थव्यवस्था में बाजार नहीं चाहता है कि उसके मुनाफे को क्षति पहुंचाने वाली किसी योजनाबद्ध विकास को जारी रहने दिया जाये. इसी के साथ केन्द्र में पिछले छः माह पहले भारी बहुमत से जीती एनडीए की सरकार का अपने पूर्ववर्ती यूपीए सरकार से जुदा होने का भ्रम टूट गया है. आखिरकार, पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह भी तो योजना आयोग में विश्व बैंक की नीतियों के अनुसार योजनाएं बना रहे थे. भारत जैसे सवा अरब की आबादी वाले देश में बिना योजना के विकास कैसे संभव है यह आने वाले समय में स्पष्ट हो जायेगा. केन्द्र सरकार नीतियां बनाने तक खुद को सीमित करना चाहती है. इससे सवाल उठता है कि फिर देश के विकास के लिय योजना कौन बनायेगा.

नीति आयोग पर सरकारी विज्ञप्ति में कहा गया है, ” शासन संरचना के संदर्भ में हमारे देश की जरूरतें बदली हैं ऐसे में एक ऐसे संस्थान की स्थापना की आवश्यकता है जो सरकार के दिशात्मक और नीति निर्धारक थिंक टैंक के रुप में कार्य करे. प्रस्तावित संस्थान प्रत्‍येक स्तर पर नीति निर्धारण के प्रमुख तत्वों के बारे में महत्‍वपूर्ण और तकनीकी सलाह देगा. इसमें आर्थिक मोर्चे पर राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय आयात के मामले, देश के भीतर और अन्य देशों में उपलब्ध सर्वोत्तम प्रक्रियाओं के प्रसार, नए नीतिगत विचारों को अपनाने और विषय आधारित विशिष्ट सहायता शामिल है. यह संस्थान लगातार बदल रहे एकीकृत विश्व के अनुरूप कार्य करने में सक्षम होगा, भारत जिसका एक भाग है. ” पूर्व योजना आयोग नीतियों पर सलाह देने के स्थान पर स्वंय ही विकास के लिये योजनाएं बनाता था जाहिर है कि उसके स्थान पर एक नख-दंत विहीन संस्था को स्थापित किया जा रहा है जो भारत को वैश्विक जरूरतों के मुताबिक नीतिगत विचारों को अपनाने के लिये सहायता देगा.


उल्लेखनीय है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सरकार ने नए साल की शुरुआत योजना आयोग की जगह राष्ट्रीय भारत परिवर्तन संस्थान आयोग के गठन का खाका पेश कर की है. नीति आयोग, केन्द्र और राज्य स्तरों पर सरकार को नीति के प्रमुख कारकों के संबंध में प्रासंगिक महत्वपूर्ण एवं तकनीकी परामर्श उपलब्ध कराएगा. जिस प्रस्ताव के माध्यम से 15 मार्च, 1950 को योजना आयोग की स्थापना की गई थी उसी के स्थान पर नया प्रस्ताव लाया गया है. नीति आयोग में आर्थिक मोर्चे पर राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय आयात, देश के भीतर, साथ ही साथ अन्य देशों की बेहतरीन पद्धतियों का प्रसार, नए नीतिगत विचारों का समावेश और विशिष्ट विषयों पर आधारित समर्थन से संबंधित मामले शामिल होंगे. बीते साल स्वतंत्रता दिवस पर लाल किले की प्राचीर से दिए गए भाषण में मोदी ने यह वादा किया था.

नीति आयोग के अध्यक्ष प्रधानमंत्री होंगे. राज्यों के मुख्यमंत्री और केंद्र शासित प्रदेशों के उप राज्यपाल इसके शासकीय परिषद में होंगे. आयोग के लिए 13 लक्ष्य तय किए गए हैं. नए आयोग के बारे में प्रधानमंत्री मोदी ने ट्वीट के जरिए कहा कि नीति आयोग के जरिए सरकार ने विकास का एक ही एजेंडा सभी पर लागू करने के नजरिए को विदाई दे दी है. नए आयोग में देश की विविधता और बहुलता को जगह दी गई है.

अनेक ट्वीट के जरिए मोदी ने कहा कि नया आयोग आम लोगों के लिए और सहयोगी विकास एजेंडा होगा और सशक्तीकरण और समानता नीति आयोग का मार्गदर्शक सिद्धांत होगा. मोदी ने कहा, “नीति आयोग से हम यह सुनिश्चित करना चाहते हैं कि हर आदमी को विकास का फल मिले और बेहतर जीवन जी सके.” उन्होंने कहा, “सबसे बड़ा बदलाव है कि इसमें सभी राज्यों के मंत्रियों और केंद्र शासित प्रदेशों के उप राज्यपालों को शामिल किया गया है. इससे सहयोगात्मक संघवाद की भावना का विकास होगा.”

मोदी ने कहा, “मैं पहले मुख्यमंत्री रहा हूं और मुख्यमंत्री से सलाह लिया जाना कितना जरूरी है यह मैं समझता हूं. नीति आयोग में इसी की व्यवस्था की गई है.”

गौरतलब है कि नीति आयोग पर सरकारी विज्ञप्ति में कहा गया है, ” सबसे महत्वपूर्ण यह है कि विश्व के सकारात्मक प्रभावों को अपनाते हुए संस्थान को इस नीति का पालन करना होगा कि भारत के परिप्रेक्ष्य में एक ही मॉडल प्रत्यारोपित नहीं किया जा सकता है. विकास के लिए हमें अपनी नीति स्वंय निर्धारित करनी होगी. देश में और देश के लिए क्या हितकारी है, संस्थान को इस पर ध्यान केंद्रित करना होगा जो विकास के लिए भारतीय दृष्टिकोण पर आधारित होगा. ” माना कि भारत विविधताओं से भरा देश है परन्तु इसके बाशिंदों के विकास को किस तरह से अलग-अलग पैमाना कैसे हो सकता है. क्या अरुणाचल प्रदेश से लेकर कश्मीर तथा छत्तीसगढ़-मध्य प्रदेश की जनता की जरूरत रोजगार, महंगाई, आवास, स्वास्थ्य, शिक्षा तथा सामाजिक सुरक्षा के मामले में आज एक सी नहीं है.

सबसे बड़ा सवाल है कि क्या विकास के लिये नीतियां बना लेना ही पर्याप्त है. सवाल इन नीतियों को लागू करने में सरकारी हस्तक्षेप का है. क्या आने वाले समय में विकास पर से सरकारी हस्तक्षेप का स्थान बाजार ले लेगा? जाहिर है कि अब योजना आयोग से अलविदा कहने का समय आ गया है.

केंद्रीय मंत्रिमंडल के बयान के मुताबिक नीति आयोग के निम्नलिखित 13 लक्ष्य होंगे :

– राष्ट्रीय विकास की एक साझा दृष्टि तैयार करना. इसके आधार पर एक राष्ट्रीय एजेंडा तैयार किया जाएगा, जिसपर प्रधानमंत्री तथा मुख्यमंत्री प्रमुखता से ध्यान देंगे.

– सहयोगात्मक संघवाद का विकास करना.

– गांव स्तर पर व्यावहारिक योजना बनाने की एक पद्धति का विकास और इससे सरकार के ऊपरी स्तर के लिए कार्ययोजना का विकास.

– आर्थिक रणनीति और नीति में राष्ट्रीय सुरक्षा सुनिश्चित करना.

– हाशिए पर रह गए लोगों पर विशेष ध्यान देना.

– रणनीति तैयार कना, दीर्घकालिक योजना और कार्यक्रम बनाना और जरूरत पड़ने पर बीच में उसका संशोधन करना.

– परामर्श देना और महत्वपूर्ण संस्थानों के बीच साझेदारी को बढ़ावा देना.

– ज्ञान, नवाचार और उद्यमिता सहयोग प्रणाली का विकास करना.

– विकास कार्य में तेजी लाने के लिए विभिन्न विभागों और क्षेत्रों के बीच विवाद निपटारा के लिए मंच के रूप में काम करना.

– सुशासन और सर्वोत्तम कार्य-पद्धतियों पर अत्याधुनिक ज्ञान केंद्र का विकास करना और संबंधित पक्षों तक उसका प्रसार करना.

– कार्यक्रमों का सक्रिय पर्यवेक्षण और मूल्यांकन करना और उसकी सफलता के लिए जरूरी सहयोग करना.

– कार्यक्रम लागू करने के लिए प्रौद्योगिकी उन्नयन और क्षमता निर्माण करना.

– राष्ट्रीय विकास एजेंडे और उपर्युक्त मकसदों के कार्यान्वयन के लिए और भी जो कुछ जरूरी हो करना.

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