सादगी नहीं नीतियों ने किया कमाल

रायपुर | विचार डेस्क: गोवा की रैली में रविवार को मोदी ने भाजपा नेताओं के सादगी के बारे में बताया था. उन्होंने उदाहरण देकर बताया था कि गोवा के भाजपाई मुख्यमंत्री मनोहर पर्रिकर कितने सादगी से जीवन व्यतीत करते हैं. नरेन्द्र मोदी ने पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी के बारें में बताया कि उनके पास रहने के लिये स्वयं का घर तक नहीं है.

सोमवार से मीडिया में यह सवाल आने लगा कि क्या नरेन्द्र मोदी दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल की सादगी से डर गये हैं. यहां पर सवाल उठना लाजिमी है कि क्या अरविंद केजरीवाल अपनी सादगी के बल पर देश की जनता के दिलों पर छा गयें हैं.

गुजरात के मुख्यमंत्री नरेन्द्र मोदी भाजपा के प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवार हैं. आम आदमी पार्टी के उदय के पहले ऐसा प्रतीत हो रहा था कि मानों मोदी भारत के प्रधानमंत्री बन ही गये हैं, मनमोहन सिंह तो केवल उनके केयरटेकर की भूमिका निभा रहें हैं.

जब से दिल्ली में आप की सरकार बनी है मोदी यदाकदा ही चैनलों में दिखाई पड़ते हैं. लोगों में भी उनके प्रति आकर्षण में कमी आयी है. इससे उनका सतर्क हो जाना स्वभाविक है. गोवा में नरेन्द्र मोदी के भाषण से इस बात का बोध हो रहा था कि अब कांग्रेस के अलावा आम आदमी पार्टी की काट उनके लिये जरूरी है.

मोदी ने जहां गोवा में कांग्रेस के भ्रष्टाचार को मुद्दा बनाया वहीं आम आदमी पार्टी के सादगी को भाजपा की रीत बताया. उनके भाषण से स्पष्ट है कि नरेन्द्र मोदी को अरविंद केजरीवाल तथा उनके पार्टी में केवल सादगी का गुण ही दिखाई दिया, तभी तो उन्होंने भाजपा के अन्य नेताओं के सादगी का बखान किया.

लगता है कि यहां पर नरेन्द्र मोदी से चूक हो गई है. उन्हें सादगी के नेपथ्य में जो नीतिया है वह नहीं दिखाई दी. आखिरकार यह आम आदमी पार्टी की नीतियां हैं जो उन्हें लोकसभा चुनाव का सशक्त दावेदार बना रही है.

आम आदमी पार्टी ने अपने चुनाव घोषणा पत्र में जनता के सामने उत्पन्न तात्कालिक समस्याओं का समाधान प्रस्तुत करने की एक ईमानदार कोशिश की है. उन्होंने कभी नहीं कहा कि वे दिल्ली से बेरोजगारी का नामो निशान मिटा देंगे.वरन् उन्होंने और बेरोजगारी न बढ़े इसलिये खुदरा क्षेत्र में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश को सोमवार को नकार दिया है.

नये नौकरी के सृजन का वादा न करके आम आदमी पार्टी ने ठेकेदार के तहत सरकारी काम करने वालों को पक्की नियुक्ति देने का वादा किया है.आम आदमी पार्टी की रणनीति है कि देश के जनता के समक्ष जो तात्कालिक समस्या है उसे पहले हल किया जाये.

विकास के लंबे चौड़े वादे न करके अरविंद केजरीवाल ने वादा किया था कि दिल्लीवासियों को 700 लीटर पानी महीने में मुफ्त मे दी जायेगी. जिसे उन्होंने सत्य में रूपान्तरित करके दिखा दिया है. सरकार बनने के 48 घंटे के भीतर दिल्ली जल बोर्ड ने घोषणा कर दी कि प्रति परिवार प्रति माह 666 लीटर पानी मुफ्त में दिया जायेगा. विकास के नाम पर बिजली उत्पादन के संयंत्र खोलने के बजाये उन्होंने बिजली के दाम को आधा करना ज्यादा मुनासिब समझा.

यह तो हुई उनकी करनी की व्याखा, इसके अलावा उनके कथनी में और ऐसी बाते हैं जिन्हें आसानी से पूरा किया जा सकता है. जैसे सरकारी स्वास्थ्य सेवाओं को बेहतर बनाना, सरकारी शिक्षा संस्थानों के स्तर को ऊपर उठाना, सस्ता तथा सुलभ सार्वजनिक
परिवहन की व्यवस्था करना आदि.

इन जनता की तरफदारी करने वाली नीतियों का कमाल है कि देश के अन्य राज्यों में आम आदमी पार्टी के प्रति लोगों का समर्थन बढ़ रहा है. जनता ने सादगी को देखते हुए हरगिज भी आम आदमी पार्टी के तरफ हाथ नहीं बढ़ाया है. जनता ने तो देखा है कि इस पार्टी की नीतिया उन्हें तात्कालिक तौर पर राहत प्रदान करती है वर्ना उस जीडीपी का क्या काम जो जनता रोजमर्रा के खर्चों में कटौती न कर सके.

जनता को इन नीतियों में अपने कठिनाईयों का फौरी हल दिखाई दे रहा जो अरविंद केजरीवाल तथा उनके पार्टी के सफलता का राज है. जहां तक सादगी का सवाल है गोवा के मुख्यमंत्री मनोहर पर्रिकर भी तो सादगी से रहते हैं फिर वे क्यों नहीं केजरीवाल की तरह लोकप्रिय हैं ?

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