जनमत के लिये उमड़ी जनता

रायपुर | संवाददाता: छत्तीसगढ़ की तीन लोकसभा सीटों कांकेर, महासमुंद और राजनांदगांव में भारी मतदान हुआ. इन इलाकों में मतदाताओं ने जबरदस्त उत्साह दिखाते हुए सुबह से ही अपनी पसंद जाहिर करनी शुरु कर दी थी. तीनों सीटों में राजनांदगांव जिले में 62 फीसदी मतदान दर्ज किया गया जबकि महासमुंद में 53.5 फीसदी और कांकेर में 65 फीसदी मतदान रिकॉर्ड किया गया.

छत्तीसगढ़ में हुए मतदान में करीब 45.56 लाख मतदाताओं ने इन तीनों सीटों के लिए प्रत्याशियों का भाग्य ईवीएम मशीन में बंद कर दिया. कांकेर लोकसभा में 1444100 मतदाता, राजनांदगांव लोकसभा 1580303 मतदाता और महासमुंद लोकसभा से 1517863 मतदाताओं ने अपने मताधिकार का प्रयोग किया.

इन तीनों लोकसभा सीटों पर चुनाव के लिए 2449 डाकमत पत्र और 20692 ईडीसी मशीन की व्यवस्था की गई. चुनाव के लिए 6114 मतदान केंद्र बनाए गए थे जिनमें 2452 अति संवेदनशील केंद्र थे. तीनों सीटों पर महासमुंद में 2010, राजनांदगांव में 2213, कांकेर में 1882 मतदान केंद्र बनाए गए थे. इन क्षेत्रों में नक्सली हिंसा की आशंका को देखते चुनाव आयोग ने यहां के नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में अलर्ट जारी किया था. इसके अलावा सुरक्षा बलों की लगभग 153 कंपनियों को सुरक्षा में तैनात किया गया. इसके अलावा स्थानीय पुलिस के करीब 20 हजार जवानों को भी लगाया गया था.

जिन तीन लोकसभा सीटों पर आज मतदान हुआ, उसमें कांकेर और राजनांदगांव माओवादियों के प्रभाव वाले इलाके रहे हैं. इसके अलावा महासमुंद लोकसभा क्षेत्र के भी कुछ इलाकों में माओवादी सक्रिय हैं. इस लिहाज से आज इन इलाकों में तगड़ी सुरक्षा व्यवस्था थी. हालांकि इसके बाद भी कांकेर में कम से कम तीन स्थानों पर मतदान दल को निशाना बनाने की कोशिश में माओवादियों ने विस्फोट किया. इसके अलावा राजनांदगांव में एक स्थान पर सुरक्षा दल के साथ मुठभेड़ हुई. लेकिन इन घटनाओं में किसी के भी हताहत होने की कोई ख़बर नहीं है.

राजनांदगांव राज्य की हाईप्रोफाइल सीट थी, जहां से मुख्यमंत्री रमन सिंह के बेटे अभिषेक सिंह चुनाव मैदान में थे, वहीं महासमुंद में भाजपा के निवर्तमान सांसद चंदूलाल साहू और उनके हमनाम 10 चंदू साहू के सामने पूर्व मुख्यमंत्री अजीत जोगी मुकाबले में थे. कांकेर में भाजपा विधायक विक्रम उसेंडी और पूर्व विधायक फुलो देवी नेताम के बीच मुकाबला था. जनता ने किस पर भरोसा जताया, फिलहाल चुनाव परिणाम के आने तक गली-मुहल्लों में कयासों के दौर चलते रहेंगे.

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