भाजपा का पोस्टर युद्ध

भोपाल | एजेंसी: भाजपा ने कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी के खिलाफ पोस्टर युद्ध छेड़ दिया है. राहुल गांधी के गुरुवार के मध्यप्रदेश की चुनावी सभा के पूर्व पोस्टर के माध्यम से भाजपा ने पांच सवाल दागे हैं. हालांकि कांग्रेस ने इसके खिलाफ चुनाव आयोग में शिकायत दर्ज करवा दी है. इस विज्ञापन में राहुल गांधी को ‘शहजादा’ कहकर संबोधित किया गया है.

इस विज्ञापन में भाजपा ने राहुल की बौद्धिक क्षमता पर भी सवाल उठाए गए हैं और कहा है कि पिछले 10 सवाल कठिन थे, आप उनका जवाब नहीं दे पाए, लिहाजा इस बार पांच पूरक सवाल पूछे जा रहे हैं. सभी प्रश्नों के साथ चार-चार विकल्प भी दिए गए हैं. इसके अलावा चार ‘लाइफ लाइन’ भी दी गई हैं.

गौर तलब है कि भाजपा ने पिछले दिनों राहुल गांधी की शहडोल व ग्वालियर में आयोजित सभाओं से पहले तमाम समाचार पत्रों में एक विज्ञापन जारी किया था. इस विज्ञापन में भाजपा ने शहजादे से 10 सवाल पूछे थे. अब राहुल गुरुवार को एक बार फिर से राज्य के प्रवास पर हैं और भाजपा ने फिर शहजादे से सवाल पूछे हैं. इस बार दस नहीं, पांच सवाल पूछे गउ हैं.

भाजपा ने इस विज्ञापन के जरिए पूछा है- “आपकी दादी के नारे ‘गरीबी हटाओ’ के 42 साल बाद भी देश से गरीबी क्यों नहीं हटी? क्या आप इसे कांग्रेस की असफ लता मानते हैं? पांच साल पहले जिस कलावती के यहां आपने रोटी खाई थी, क्या आपको उस गरीब महिला के परिवार की स्थिति का पता है?” इसके अलावा राबर्ट वाड्रा भूमि विवाद, कोयला घोटाले में प्रधानमंत्री की भूमिका और खाद्यान्न सुरक्षा पर सवाल पूछे गए हैं.

यह भी बताया गया है कि खाद्यान्न सुरक्षा योजना से पहले राज्य में मुख्यमंत्री अन्नपूर्णा योजना शुरूकी जा चुकी है.

भाजपा के इस विज्ञापन में राहुल गांधी का नाम नहीं लिखा है, मगर उनका अक्स जरूर है, जिससे जाहिर होता है कि वह राहुल ही हैं. वह गले में तीन रंगों का दुशाला डाले हुए हैं. भाजपा के राज्यसभा सांसद अनिलमाधव दवे इस बात की पुष्टि करते हैं कि विज्ञापन के शहजादे राहुल गांधी ही हैं. उनका कहना है कि राहुल गांधी अपने घर की समस्या और अन्य बातों का जिक्र कर लोगों को भावुक करने की कोशिश रह रहे हैं.

कांग्रेस के सांसद प्रेमचंद्र गुड्डू ने भाजपा के विज्ञापन पर आपत्ति जताते हुए कहा है कि वे इसकी शिकायत निर्वाचन आयोग से करेंगे.

भाजपा के विज्ञापन ने एक बात तो जाहिर कर दी है कि आने वाले दिनों में आरोप तथा हमलों की धार लगातार तीखी होती जाएगी, मगर इस पर विराम कहां लगेगा, इसे कोई नहीं जानता. फिलहाल जनता देख रही है वह तो मतो के रूप में अपना मत दर्ज करवाती आई है.

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