महिलाओं को सुरक्षा दें: प्रधानमंत्री

नई दिल्ली | एजेंसी: प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने सुरक्षा बलो से महिलाओं तथा बच्चों को और अधिक सुरक्षा देने की बात कही है. प्रधानमंत्री ने दिल्ली में पुलिस अधिकारियों की बैठक में यह बात शनिवार को कही.

प्रधानमंत्री ने कहा, “पिछले वर्ष दिसंबर में दिल्ली में एक युवती के साथ हुए बर्बरतापूर्वक दुष्कर्म के बाद न सिर्फ महिलाओं की सुरक्षा के मुद्दे को केंद्र में ला दिया है, बल्कि इस तरह के अपराधों से बचाव में लोगों की पुलिस से अपेक्षाएं भी बढ़ा दी हैं.”

प्रधानमंत्री ने आगे कहा, “हमने हाल ही में कई कानून पारित कर इस तरह के अपराधों के लिए सख्त सजा के प्रावधान किए हैं, तथा जांच एवं सुनवाई के दौरान पीड़ित व्यक्ति के साथ अधिक संवेदनशीलता भी सुनिश्चित की है.”

मनमोहन सिंह ने कहा, “हमें महिलाओं एवं बच्चों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए अन्य संस्थानिक प्रणाली को भी नियुक्त किए जाने की जरूरत है. मैं राज्यों के पुलिस महानिदेशकों से इस दिशा में अगुवा की भूमिका अदा किए जाने की उम्मीद करता हूं.”

उल्लेखनीय है कि पिछले वर्ष 16 दिसंबर को एक 23 वर्षीय युवती के साथ चलती बस में बर्बरतापूर्वक दुष्कर्म करने वाले सभी छह अपराधियों को सजा सुना दी गई है. पीड़िता की 29 दिसंबर को मृत्यु हो गई.

दोषियों में चार को मृत्युदंड दिया गया है, जबकि एक नाबालिग को तीन वर्ष के लिए सुधार गृह भेज दिया गया है. एक आरोपी ने न्यायिक हिरासत के दौरान तिहाड़ जेल में खुदकुशी कर ली थी.

इसके साथ ही प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने सुरक्षा बलो को आगाह किया कि आने वाले विधानसभा तथा लोकसभा के चुनाव में आतंकी गड़बड़ी फैला सकते हैं इसका ध्यान रखें. मनमोहन सिंह ने सांप्रदायिक शक्तियों से भी सावधान रहने को कहा है जो चुनाव के पूर्व गड़बड़ी फैला सकते हैं.

प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने आगे कहा है कि पूर्वोत्तर राज्यों में जटिल सुरक्षा परिस्थितियां चिंता का कारण बनी हुई हैं. मनमोहन सिंह ने शनिवार को वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों के वार्षिक सम्मेलन में कहा कि पूर्वोत्तर राज्यों में विद्रोह, जबरन वसूली और जनाक्रोश ऐसे मुख्य विघटनकारी तत्व हैं जिनके कारण सुरक्षा स्थितियां जटिल बनी हुई हैं.

प्रधानमंत्री ने कहा, “सरकार की तरफ से किए गए लगातार प्रयासों के कारण ही विद्रोही एवं जातीय अलगावावादी समूहों के बीच बातचीत में महत्वपूर्ण प्रगति हुई है.”

मनमोहन सिंह ने आगे कहा, “असम का निचला संवेदनशील क्षेत्र और जातीय एवं सांप्रदायिक तनाव वाला कर्बी आंगलांग क्षेत्र, बोडो इलाके में जनजातीय एवं गैर-जनजातीय समुदाय के बीच बढ़ता अविश्वास, मेघालय के गारो में चल रहा विद्रोह, मणिपुर में गैर-मणिपुरी नागरिकों को लगातार निशाना बनाया जाना भी महती चिंता की बातें हैं.”

प्रधानमंत्री ने कहा कि इनसे सम्मिलित एवं दृढ़ संकल्प के साथ निबटने की जरूरत है.

नक्सल समस्या पर प्रधानमंत्री ने छत्तीसगढ़ के नक्सल प्रभावित इलाकों में सफलतापूर्वक मतदान कराए जाने की सराहना की.

उन्होंने नक्सल प्रभावित इलाकों में प्रशासन की गुणवत्ता में सुधार और क्षेत्र में विकास को गति दिए जाने का आह्वान किया.

प्रधानमंत्री ने नक्सल प्रभावित इलाकों में तैनात सुरक्षा बलों को स्थानीय लोगों के सामाजिक-सांस्कृतिक परंपराओं के प्रति अधिक संवेदनशील बनाए जाने पर भी जोर दिया.

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