राफेल के लपेटे में आई अभिनेत्री जूली

नई दिल्ली | संवाददाता: राफेल विमान सौदे से ठीक पहले अंबानी की कंपनी और फ्रांस के राष्ट्रपति ओलांद की महिला मित्र अभिनेत्री जूली गेयेट में डील हुई थी. कहा जा रहा है कि अंबानी ने फ्रांसिसी राष्ट्रपति की दोस्त की मदद की थी. इसके अलावा ठेके के दो दिन पहले फिल्म बनाने का करार किया था. रिलायंस डिफेंस को 59 हजार करोड़ का ठेका मिला था.

यह सारी सनसनीखेज जानकारियां फ्रांस की मीडिया में सामने आई हैं. राफेल सौदे को लेकर आई यह नई जानकारी मोदी सरकार की मुश्किल बढ़ाने का काम कर सकती है.


द इंडियन एक्सप्रेस की एक रिपोर्ट के मुताबिक फ्रांस के राष्ट्रपति फ्रांस्वा ओलांद ने जिस दिन 26 जनवरी 2016 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ 36 रफाल विमानों की खरीद से जुड़े सहमति पत्र पर हस्ताक्षर किए थे, उससे दो दिन पहले ही अनिल अंबानी की कंपनी रिलायंस एंटरटेनमेंट ने उनकी मित्र और अभिनेत्री जूली गेयेट के साथ एक फिल्म बनाने का समझौता किया था. जूली फ्रांस की जानी-मानी फिल्म अभिनेत्री और फिल्म निर्माता हैं.

जूली उस समय राष्ट्रपति के आधिकारिक निवास में उनके साथ ही रहती थीं. फ्रांस मीडिया ने भारत में चल रहे राफेल ‘घोटाला’ विवाद की तुलना 1980 के दशक में बोफोर्स घोटाले से करते हुए सवाल खड़ा किया है.

फ्रांस के प्रमुख अखबार फ्रांस 24 ने कहा है कि आखिर कैसे 2007 में शुरू हुई डील से 2015 में हिंदुस्तान एरोनॉटिक्स लिमिटेड (एचएएल) को बाहर करते हुए निजी क्षेत्र की रिलायंस डिफेंस को शामिल किया गया?

उसी साल बाद में अनिल अंबानी की रिलायंस डिफेंस को 59 हजार करोड़ रु का वह ठेका मिला जो दोनों देशों के बीच हुए विमान सौदे की शर्तों का एक हिस्सा था. इसके तहत डसॉल्ट रिलायंस एयरोस्पेस नाम की एक नई कंपनी बनाई जानी थी, जिसमें 51 फीसदी हिस्सा रिलायंस डिफेंस का होना था और बाकी यानी 49 फीसदी रफाल बनाने वाली कंपनी डसॉल्ट का.

यह सौदे के ऑफसेट क्लाज के तहत हुआ था. इसके मुताबिक फ्रांस को इस करार की कुल राशि का करीब 50 फीसदी भारत में रक्षा उपकरणों और इससे जुड़ी दूसरी चीजों में निवेश करना था.

इस रिपोर्ट के मुताबिक 24 जनवरी 2016 को रिलायंस एंटरटेनमेंट ने ऐलान किया कि वह जूली गाए कि फर्म रोग इंटरनेशनल के साथ एक करार कर रही है और इसके तहत दोनों मिलकर एक फ्रेंच फिल्म बनाएंगे.

इसके बाद 26 जनवरी को दोनों देशों ने 36 रफाल विमानों की खरीद के समझौते पर दस्तखत किए. वहीं, जिस फिल्म के निर्माण में रिलायंस भागीदार बनी थी उसे फ्रांसीसी अभिनेता और फिल्मकार सैवज हजानास्यूइस ने निर्देशित किया. ‘टू ला ओट’ नाम की यह फिल्म 20 दिसंबर 2017 को फ्रांस में रिलीज हुई.

कांग्रेस इस सौदे को लेकर मोदी सरकार पर लगातार हमलावर है. उसका आरोप है कि सरकार ने यह सौदा यूपीए सरकार की तुलना में तीन गुना ज्यादा कीमत पर किया है. उधर, सरकार इससे इनकार करती रही है.

एचएएल बाहर और अंबानी अंदर

फ्रांस 24 अपनी रिपोर्ट ने कहती है कि डील में हुआ एक अहम बदलाव सबको आश्चर्यचकित करने वाला था. भारत में एचएएल के पास रक्षा क्षेत्र में मैन्यूफैक्चरिंग का 78 साल का तजुर्बा था और वह इस ऑफसेट क्लॉज में एक मात्र कंपनी थी जिसके पक्ष में फैसला किया जाता.

लेकिन दसॉल्ट ने एचएएल से करार तोड़ते हुए अनिल अंबानी की रिलायंस ग्रुप से करार कर लिया. खास बात यह है कि इस वक्त तक रिलायंस के पास रक्षा क्षेत्र की मैन्यूफैक्चरिंग तो दूर उसे एविएशन सेक्टर का भी कोई तजुर्बा नहीं था. वहीं फ्रांस 24 रिलायंस समूह के प्रमुख अनिल अंबानी के लिए लिखता है कि उनका इतिहास विवादों से भरा है.

बन सकता है बोफोर्स

फ्रांस 24 ने लिखा है कि मौजूदा परिस्थिति में साफ है कि राफेल डील भारत के आगामी आम चुनावों में ठीक वही भूमिका अदा कर सकता है, जो 1980 के दशक में बोफोर्स डील ने किया था.

गौरतलब है कि बोफोर्स डील पर विवाद के चलते राजीव गांधी के नेतृत्व वाली कांग्रेस सरकार को सत्ता से बाहर जाना पड़ा था, वहीं इस बार निशाने पर बीजेपी सरकार है.

कांग्रेस ने साधा निशाना

पूर्व केंद्रीय मंत्री आनंद शर्मा ने लखनऊ में राफेल विवाद के मुद्दे पर पत्रकारों को संबोधित किया. आनंद शर्मा ने कहा कि राफेल घोटाला अब तक का सबसे बड़ा घोटाला है. उन्होंने कहा कि मोदी सरकार इस मामले को किसी भी तरह से जेपीसी के पास भेजने के लिए तैयार नहीं है.

आनंद शर्मा ने कहा कि अगर इस मामले में सुप्रीम कोर्ट खुद संज्ञान लेता है तो अच्छी बात होगी. कांग्रेस नेता ने कहा कि 2019 में उनकी पार्टी की सरकार जब सत्ता में आएगी तो वह राफेल डील विवाद की जांच के लिए राष्ट्रीय जांच कमिशन बनाएंगे.

उन्होंने कहा कि इस घोटाले की पूरी जांच करवाकर हम जिम्मेदारी तय करेंगे.

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