रैगिंग करने वाले 6 सस्पेंड

बिलासपुर | संवादादाता: सरकारी इंजीनियरिंग कॉलेज में रैगिंग करने वाले 6 छात्रों को सस्पेंड कर दिया गया है. कॉलेज प्रबंधन का दावा है कि वे रैगिंग के इस मामले में हर संभव कार्रवाई कर रहे हैं लेकिन इस मामले में प्रबंधन ने रैगिंग की जानकारी अब तक पुलिस को नहीं दी है.

गौरतलब है कि बिलासपुर के शासकीय इंजीनियरिंग कॉलेज में पिछले कई सालों से रैगिंग के मामले सामने आते रहे हैं. लेकिन कॉलेज प्रबंधन ने इसे रोकने के लिये कभी कोई गंभीर पहल नहीं की. एक दिन पहले सामने आये रैगिंग के इस मामले में वरिष्ठ छात्रों की प्रताड़ना से एक छात्र के कान का परदा फट गया, जिसके बाद उसके परिजनों ने प्रबंधन से शिकायत की.


पीड़ित छात्र संतोष जांगड़े ने बताया कि सीनियर छात्रों ने कॉलेज के हॉस्टल में दर्जनों लड़कों की रैगिंग की और उनके साथ अमानवीय व्यवहार किया. नये आये इंजीनियरिंग के बच्चों में खौफ ऐसा था कि वे सबकुछ बर्दाश्त करते रहे. लेकिन रैगिंग का सिलसिला नहीं रुका तो दर्जन भर छात्र हॉस्टल छोड़ कर भाग गये.

शनिवार को अमरकटक हॉस्टल में रैगिंग के दौरान संतोष जांगड़े के कान का परदा फट गया तो उसने अपने परिजनों को सारा वाकया बताया. इसके बाद परिजनों ने इसकी शिकायत कॉलेज और हॉस्टल प्रबंधन से की.

कॉलेज प्रबंधन का दावा है कि इस मामले में 6 छात्रों को क्लास से सस्पेंड कर दिया गया है और 4 के खिलाफ हॉस्टल से निकालने की प्रक्रिया शुरु की गई है. जिन छात्रों को सस्पेंड किया गया है, उनमें शैलेष भोई, हरिशंकर पटेल, राजमन बरसे, विद्यासागर मरकाम, प्रवीण राठौर और हरीश वर्मा शामिल हैं.

इंजीनियरिंग कॉलेज के प्राचार्य एमआर मेश्राम का कहना है कि इस मामले में कॉलेज प्रबंधन ने अपनी तरफ से पूरी कार्रवाई की है और ज़रुरी हुआ तो मामले की एफआईआर भी दर्ज कराई जाएगी. दूसरी और पीड़ित छात्रों का कहना है कि कॉलेज प्रबंधन कार्रवाई का बहाना कर के एफआईआर से बचना चाह रहा है. रैगिंग से प्रताड़ित छात्रों के परिजनों का कहना है कि अगर इस मामले में पुलिस में शिकायत दर्ज नहीं कराई गई तो वे खुद पुलिस में जाएंगे.

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